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बिहार में एक्सप्रेसवे का होगा विस्तार, डोभी-राजगीर-बोधगया को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी; 35 हजार करोड़ की योजना

Published: Sat, 29 Aug 2026 10:09 AM (GMT+05:30)

बिहार सरकार ने प्रमुख एक्सप्रेसवे को धार्मिक और पर्यटन स्थलों से जोड़ने के लिए केंद्र को 35 हजार करोड़ रुपये ...और पढ़ें

एक्‍सप्रेसवे से जुड़ेंगे राज्‍य के प्रमुख शहर और पर्यटन स्‍थल। सांकेत‍िक तस्‍वीर

एक्‍सप्रेसवे से जुड़ेंगे राज्‍य के प्रमुख शहर और पर्यटन स्‍थल। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. एक्सप्रेसवे से धार्मिक-पर्यटन स्थलों को जोड़ने का प्रस्ताव भेजा।

  2. गया, बोधगया, राजगीर को मिलेगी सीधी सड़क कनेक्टिविटी।

  3. 35 हजार करोड़ की योजना, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ी तैयारी की है। प्रमुख एक्सप्रेसवे को महत्वपूर्ण शहरों के साथ-साथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

इसके लिए बिहार सरकार ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार, वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से गया के डोभी और नालंदा के राजगीर को जोड़ा जाएगा।

वहीं, आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को कनेक्टिविटी देने की तैयारी है। इन स्थलों तक पहुंच के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ब्रांच सड़क यानी स्पर का निर्माण किया जाएगा।

35 हजार करोड़ की परियोजना, बिहार में 170 किमी का हिस्सा

प्रस्तावित सड़क कनेक्टिविटी परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 610 किलोमीटर होगी। परियोजना पर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें बिहार में करीब 170 किलोमीटर सड़क का हिस्सा होगा।

सरकार का मानना है कि एक्सप्रेसवे को प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों से जोड़ने से राज्य के भीतर आवागमन आसान होगा।

साथ ही, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी गया, बोधगया और राजगीर जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंचने में सुविधा होगी।

चार जिलों से होकर गुजरेगा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे बिहार के चार जिलों—कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गयाजी से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को बिहार के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल से जोड़ेगा।

बिहार सरकार ने एक्सप्रेसवे के मौजूदा एलाइनमेंट में बदलाव का भी प्रस्ताव दिया है। इसके तहत सासाराम के पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग बनाकर एक्सप्रेसवे को गुजारने की योजना है। सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, इससे एक्सप्रेसवे की दूरी करीब 15 किलोमीटर कम हो सकती है।

आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया-राजगीर को जोड़ने की तैयारी

5000 की लगात वाले आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 198 किलोमीटर है। यह गया जिले के आमस से शुरू होकर दरभंगा तक जाता है। अब इसके जरिए बोधगया और राजगीर को जोड़ने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

इसके लिए एक्सप्रेसवे से ब्रांच रोड (स्पर) निकाली जाएगी। इससे बोधगया और राजगीर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को सीधे बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा सकेगा।

पर्यटन और कारोबार दोनों को मिलेगा फायदा

सरकार की इस योजना से बिहार के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। गया और बोधगया में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि राजगीर भी बिहार के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल है।

एक्सप्रेसवे नेटवर्क से इन स्थलों की कनेक्टिविटी बेहतर होने पर यात्रा का समय कम होने के साथ-साथ स्थानीय कारोबार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

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