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बिहार के किसानों की होगी चांदी, हल्दी-अदरक की खेती पर मिलेंगे ₹40 हजार; टमाटर-प्याज पर भी सरकार देगी भारी अनुदान

Published: Sat, 07 Nov 2026 09:59 PM (IST)

बिहार सरकार ने इस साल रबी फसलों की खेती का रकबा 48 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, ...और पढ़ें

6 लाख हेक्टेयर ज्यादा जमीन पर होगी खेती

6 लाख हेक्टेयर ज्यादा जमीन पर होगी खेती

HighLights

  1. रबी फसलों का लक्ष्य 48 लाख हेक्टेयर, 6 लाख अधिक।

  2. हल्दी, अदरक पर 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान।

  3. टमाटर, प्याज पर भी मिलेगा भारी आर्थिक सहयोग।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार इस साल रबी फसलों की खेती का दायरा बढ़ाने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने की भी तैयारी में है। कृषि विभाग ने इस वर्ष करीब 48 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की खेती कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। खास बात यह है कि पिछले साल की तुलना में इस बार छह लाख हेक्टेयर अधिक जमीन पर खेती कराने की योजना है।

सरकार का जोर सिर्फ गेहूं और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों पर नहीं, बल्कि टमाटर, मिर्च, प्याज, हल्दी और अदरक जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर भी है।

इसके लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 हजार रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को लक्ष्य के अनुसार खेती का रकबा बढ़ाने और योजनाओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

पिछले साल से 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा जमीन पर होगी खेती

कृषि विभाग के अनुसार, पिछले वर्ष बिहार में करीब 42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती हुई थी। इस वर्ष इसे बढ़ाकर 48 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में खेती की नियमित समीक्षा होगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि जहां भी लक्ष्य प्राप्ति में कमी सामने आएगी, वहां आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

गेहूं से लेकर मक्का तक, जानिए किस फसल का कितना लक्ष्य

इस वर्ष निर्धारित 48 लाख हेक्टेयर के कुल लक्ष्य में अलग-अलग फसलों के लिए भी रकबा तय किया गया है।

  • गेहूं की खेती – 24 लाख हेक्टेयर
  • मक्का की खेती – 6 लाख हेक्टेयर
  • दलहन की खेती – 5 लाख हेक्टेयर
  • तिलहन की खेती – 4 लाख हेक्टेयर
  • आलू, सब्जी, मसाला और अन्य फसलें – 9 लाख हेक्टेयर

सरकार का प्रयास है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ दूसरी लाभकारी फसलों को भी अपनाएं, ताकि उनकी आमदनी के नए रास्ते खुल सकें।

हल्दी-अदरक की खेती करने पर मिलेंगे 40 हजार रुपये

फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार हल्दी और अदरक की खेती पर विशेष अनुदान देगी। कृषि मंत्री के अनुसार, इन फसलों की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये की निर्धारित लागत तय की गई है।

इस लागत का 40 प्रतिशत यानी अधिकतम 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। हल्दी और अदरक की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए फरवरी-मार्च में कार्यक्रम संचालित किया जाएगा।

टमाटर, मिर्च और पत्ता गोभी पर भी मिलेगी सब्सिडी

किसानों को टमाटर, मिर्च और पत्ता गोभी की खेती के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी। इन फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर 60 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान का प्राविधान किया गया है।

इस हिसाब से किसानों को अधिकतम 24 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी। इन फसलों के हाइब्रिड बीजों की टैगिंग प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और उनकी आपूर्ति भी शुरू कर दी गई है।

प्याज की खेती करने वालों को मिलेंगे 20 हजार रुपये

बिहार में प्याज की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए सरकार ने नई प्रभेद बीमा शक्ति को भी योजना में शामिल किया है। इसके अलावा एग्री पांड लाइट रेड किस्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

प्याज की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। यानी किसानों को अधिकतम 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

न्यूनतम 0.1 और अधिकतम 2 हेक्टेयर तक मिलेगा लाभ

प्याज की खेती से जुड़ी इस योजना के तहत किसानों को न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र में खेती करने पर अनुदान का लाभ दिया जाएगा।

इस व्यवस्था से छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों को योजना से जोड़ने की कोशिश की गई है। सरकार का उद्देश्य प्याज सहित दूसरी वैकल्पिक फसलों का उत्पादन बढ़ाना है।

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण पर जोर

कृषि विभाग का मानना है कि केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय किसान सब्जियों और मसाला फसलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी के अवसर बढ़ा सकते हैं।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई) के तहत निर्धारित लागत का 40 प्रतिशत अनुदान देने की व्यवस्था की गई है।

हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता और आर्थिक सहायता के जरिए सरकार किसानों को वैकल्पिक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अब विभाग के सामने 48 लाख हेक्टेयर में खेती का लक्ष्य पूरा करने की चुनौती होगी।

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