बिहार में बाढ़ का कहर: गंगा समेत 8 नदियां उफान पर, 13 जिलों में बिगड़े हालात; पलायन को मजबूर हुए लोग
बिहार में गंगा सहित आठ प्रमुख नदियाँ उफान पर हैं, जिससे पटना समेत 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर ...और पढ़ें
HighLights
गंगा सहित आठ प्रमुख नदियाँ बिहार में उफान पर हैं।
पटना समेत 16 जिलों में बाढ़ से हालात गंभीर, लोग विस्थापित।
प्रशासन ने आपदा प्रबंधन के तहत बचाव और राहत कार्य तेज किए।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की 8 प्रमुख नदियां उफान पर हैं। पटना समेत करीब 13 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
इस कारण कई जगहों पर लोग विस्थापित हो गए हैं। सड़क किनारे, सामुदायिक भवन आदि जगहों पर विस्थापित शरण लेने लगे हैं। संबंधित जिला प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी में जुटा है।
पटना के अलावा बक्सर, मुंगेर और भागलपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। भोजपुर, बेतिया, बेगूसराय, खगड़िया, रोहतास, जहानाबाद आदि जिले भी बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ के मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। नदी घाट और तटबंध से लोगों को दूर रहने की अपील की गई है। पटना के गांधी घाट और हाथीदह में गंगा का पानी तेजी से बढ़ रहा है।
आपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि यही तेजी जारी रही तो अब तक का सबसे ज्यादा जलस्तर का रिकॉर्ड टूट सकता है। गंगा का पानी शहर में प्रवेश नहीं करे, इसके लिए शहरी सुरक्षा दीवार के सभी 108 गेट बंद कर दिए गए हैं। जिलाधिकारी, नगर आयुक्त आदि ने गुरुवार शाम शहर का जायजा लिया।

(गंगा का जलस्तर बढ़ते ही राजापुल स्थित निचले इलाके में प्रवेश करने लगा गंगा का पानी।)
गंगा के अलावा पुनपुन और दरधा में भी उफान
गंगा के अलावा पुनपुन व दरधा के लगातार बढ़ते जलस्तर ने जिले के पश्चिम से पूर्व और दक्षिण से उत्तर तक दबाव बढ़ा दिया है। दक्षिणी पटना में पुनपुन श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.29 मीटर और दरधा कोल्हाचक में 3.07 मीटर ऊपर पहुंच चुकी है।
इससे मोकामा का जंजीरा दियारा पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ चुका है। लोग स्कूल की छत पर शरण लिए हुए हैं और अन्य ऊंचे सुरक्षित स्थानों को जा चुके हैं।
बख्तियारपुर के कई दियारा पंचायतों में निचले घरों में पानी पहुंच गया है। दूसरी तरफ पुनपुन-दरधा के उफान से गौरीचक बाजार सहित करीब तीन दर्जन गांव पानी से घिर गए हैं।
फुलवारी प्रखंड में पुनपुन बांध से सटे चिहुंट, सकरैचा, मेहमानपुर, बकपुर और तारापुर समेत कई गांवों में भी ग्रामीण रातभर बांध और नदी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
गंडक बराज वाल्मीकिनगर से शुक्रवार को ़़ बजे 1,42,800 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। जल संसाधन विभाग की सुबह छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के मनेर में गंगा 53.46 मीटर पर पहुंच गई है।
शाम छह बजे यहां जलस्तर 53.46 मीटर ही था, यानी कोई वृद्धि नहीं हुई। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 53.79 मीटर है यानी अभी इससे 33 सेंटीमीटर नीचे है।
12 घंटे में मनेर में 3.08 मीटर उछला जलस्तर
गंगा के जलस्तर में तेज वृद्धि सबसे बड़ी चिंता है। तीन सितंबर सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मनेर में जलस्तर 53.35 से 53.45 मीटर के आसपास दर्ज हुआ।
दीघा में सुबह 53.35 मीटर से शाम पांच बजे 53.45 मीटर तक पानी पहुंचा। गांधीघाट में यह 51.58 से 51.63 मीटर रहा। तीनों जगह जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर है और लगातार बढ़ रहा है।
बक्सर में तेजी से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर

(कंचन नदी में बढ़ा बाढ़ का पानी, कई सीढ़ियां डूबीं।)
बक्सर जिले में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। गंगा का जलस्तर हर घंटे एक-दो सेंटीमीटर ऊपर जा रहा है। बीते 24 घंटे में लगभग 16 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।
ब्रह्मपुर की नैनीजोर पंचायत के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ढाबी और गजाधर डेरा में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है, जबकि सजीवन डेरा चारों तरफ से घिर गया है। आधा दर्जन गांवों के रास्ते जलमग्न हो गए हैं।
भोजपुर में 3 लाख की आबादी प्रभावित

(आरा-बक्सर पुराना रोड पर चौकीपुर गांव के समीप सड़क पर चढ़ा बाढ़ का पानी।)
भोजपुर जिले में बाढ़ के पानी से हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। पहले जहां तीन प्रखंडों में बाढ़ के पानी का असर था, वह बढ़ते हुए अब छह प्रखंडों में पहुंच गया है।
गुरुवार को बाढ़ का पानी आरा बक्सर पुराने हाईवे पर चौकीपुर के समीप तथा आरा में मझउआ हवाई अड्डा सड़क पर पानी चढ़ जाने से आवागमन प्रभावित होने लगा है।
दूसरी तरफ गुरुवार को लगातार दूसरे दिन 62 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को सुरक्षा के दृष्टिकोण से बंद किया गया। जिले में गंगा का पानी अब विकराल रूप ले चुका है।
मुंगेर के दियारा इलाके में फैला पानी
मुंगेर जिले में टेटिया बंबर क्षेत्र में महाने नदी पर बरसंडा क्षेत्र में बना डायवर्सन बह गया है। दियारा इलाके में पानी फैलने से लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है।
भागलपुर में गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच जिले में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। राघोपुर-काजीकोरैया बांध में क्षति बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। नाव, मानवबल और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।
गंगा का जलस्तर 22 अगस्त से खतरे के निशान से ऊपर बढ़ रहा है। 24 अगस्त की रात राघोपुर-काजीकोरैया बांध टूटने से खरीक अंचल की राघोपुर पंचायत प्रभावित हुई।
अब तक 62,698 आपदा पीड़ितों को भोजन कराया जा चुका है। राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध में तेज कटाव और अंडरमाइनिंग से पहले करीब 30 मीटर लंबाई में क्षति हुई थी।
एक सितंबर की सुबह दोबारा क्षति होने के बाद अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम कटाव बढ़ गया। इससे ब्रीच की कुल लंबाई करीब 400 मीटर तक पहुंच गई।
रोहतास में इंद्रपुरी बराज से छोड़ा गया 4,55,677 क्यूसेक पानी
रोहतास जिले के नौहट्टा, रोहतास, तिलौथू, नासरीगंज, डेहरी समेत अन्य प्रखंडों के कई गांवों में नदियों का पानी अब कम होने लगा है। शुक्रवार को रिहंद जलाशय से 17036 व भीम बराज से 29005 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
मध्यप्रदेश के बाणसागर से तीन दिनों पूर्व छोड़ा गया पानी सोन में पहुंच रहा है। डीएम दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि सोन व अन्य नदियों के जलस्तर पर जिला प्रशासन नजर बनाए हुए है।
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। एसडीआरएफ की टीम को जगह-जगह तैनात की गई है। सोन नहरों में पानी की आपूर्ति को शुरू करा दिया गया है। पश्चिमी संयोजक नहर में 5922 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
