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    भारत पर्व महोत्सव में बिहार के सुपरफूड मखाना की झांकी ने बटोरी सुर्खियां, जमकर ली गई सेल्फियां

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 07:06 PM (IST)

    लाल किला पर आयोजित भारत पर्व महोत्सव में बिहार की मखाना झांकी ने खूब प्रशंसा बटोरी। मिथिला की संस्कृति से जुड़ा यह सुपरफूड न्यूट्रिशन और इंटरनेशनल मार ...और पढ़ें

    बिहार की मखाना झांकी। (जागरण)

    बिहार की मखाना झांकी। (जागरण)

    HighLights

    1. लाल किला पर बिहार की मखाना झांकी को खूब सराहा गया।

    2. बिहार देश के 85% से अधिक मखाना का उत्पादन करता है।

    3. उन्नत किस्मों से मखाना उत्पादन 56 हजार टन से अधिक हुआ।

    राज्य ब्यूरो, पटना। इस बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किला परिसर में आयोजित छह दिवसीय भारत पर्व महोत्सव में सुपर फ़ूड मखाना को केंद्र में रखकर बनाई गई बिहार की झांकी को लोगों ने खूब सराहा और उत्साह में जमकर सेल्फी भी ली।

    मिथिला की संस्कृति और परंपरा से जुड़ा मखाना आज न्यूट्रिशन, मेडिसिन और इंटरनेशनल फूड मार्केट में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर यह उत्पाद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नई पीढ़ी की पहली पसंद बनता जा रहा है। छह दिवसीय महोत्सव शनिवार को समाप्त हुआ।

    भारत में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिहार से आता है। वर्ष 2012 तक जहां राज्य में लगभग 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती होती थी, वहीं अब यह बढ़कर 35 हजार 224 हेक्टेयर से अधिक हो चुकी है।

    मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और मखाना विकास योजना (2019-20) ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। “स्वर्ण वैदेही” और “सबौर मखाना-1” जैसे उन्नत प्रभेदों के प्रोत्साहन से उत्पादन 56 हजार टन के पार पहुंच चुका है।

    इसका सीधा असर किसानों की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2005 में जहां मखाना/मत्स्य जलकरों से राज्य को 3.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता था। वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये हो गया है।

    दरभंगा को मखाना प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। अन्य राज्यों के किसान भी तकनीकी प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं।

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