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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 04, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Monsoon: बिहार में मानसून फिर सक्रिय हुआ, पटना सहित प्रदेश में झमाझम बारिश के आसार बढ़े

    Updated: Sun, 04 Aug 2024 07:44 AM (GMT+05:30)

    Bihar Rain News राजधानी पटना समेत प्रदेश में एक अगस्त से मानसून तेजी से सक्रिय हुआ है। इसके कारण एक बार फिर से यहां झमाझम बारिश का दौर शुरू होने के आस ...और पढ़ें

    राजधानी सहित प्रदेश में एक अगस्त से मानसून की सक्रियता काफी बढ़ गई है।
    राजधानी सहित प्रदेश में एक अगस्त से मानसून की सक्रियता काफी बढ़ गई है।

    HighLights

    1. वैशाली एवं मधुबनी में सामान्य से 57 प्रतिशत कम वर्षा रिकार्ड की गई
    2. अब तक पूरे राज्य में सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा हुई है
    3. अगस्त में राज्य में अच्छी वर्षा के आसार हैं

    जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी सहित प्रदेश में एक अगस्त से मानसून की सक्रियता काफी बढ़ गई है। ऐसे में एक बार फिर झमाझम वर्षा के आसार बढ़ गए हैं। अब तक राज्य में सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।

    तीन अगस्त तक मानसून के दौरान राज्य में 531.3 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन 316.8 मिलीमीटर हुई। इस वर्ष मानसून के दौरान वर्षा न होने से वैशाली एवं मधुबनी की हालत सबसे ज्यादा खराब है।

    वैशाली एवं मधुबनी में सामान्य से 57 प्रतिशत कम वर्षा रिकार्ड की गई है। वैशाली में तीन अगस्त तक 484.6 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए, परंतु वहां पर 210.7 मिलीमीटर वर्षा अब तक रिकार्ड की गई। वहीं, मधुबनी में अब तक 551.7 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन 236.2 मिलीमीटर ही हुई। 

    पटना में सामान्य से 48 प्रतिशत कम हुई वर्षा

    पटना जिले में मानसून के दौरान 48 प्रतिशत कम वर्षा रिकार्ड की गई। जिले में अब तक 469.5 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन 245.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अगस्त में राज्य में अच्छी वर्षा के आसार हैं। अगले दो माह में वर्षा की कमी पूरी कर ली जाएगी।

    बढ़ी धान की रोपनी

    पिछले दो दिनों से राज्य में वर्षा में तेजी आने से धान की रोपनी में तेजी आ गई है। किसान जल्दी से जल्दी धान की रोपनी करना चाहते हैं। राज्य में सामान्यत: 15 अगस्त तक धान की रोपनी की जाती है। उसके बाद रबी की बुआई प्रभावित होने का खतरा रहता है। वर्षा नहीं होने के कारण धान की रोपनी पहले ही विलंबित हो चुकी है।

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