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    बिहार के गांव में ही मिलेगा रोजगार; पैक्स और एफपीओ शुरू करेंगे 50 नए बिजनेस, नीति आयोग की योजना को रफ्तार

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 07:33 PM (IST)

    सहकारिता विभाग के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि गांवों में रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता के लिए पैक्स व एफपीओ 50-50 नए व्यवसाय शुरू करेंगे। डीएनएस ...और पढ़ें

    गांव में शुरू होंगे कई तरह के व्‍यवसाय। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

    गांव में शुरू होंगे कई तरह के व्‍यवसाय। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

    HighLights

    1. पैक्स और एफपीओ 50-50 नए व्यवसाय शुरू करेंगे।

    2. गांवों में रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

    3. नीति आयोग 10 हजार एफपीओ गठन की योजना पर काम कर रहा।

    राज्य ब्यूरो, पटना। सहकारिता विभाग के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिले और आत्मनिर्भर गांव का निर्माण हो, इसके लिए विभाग तेजी से प्रयास कर रहा है।

    प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सभी पैक्स और एफपीओ अपने-अपने क्षेत्र में 50-50 व्यवसाय शुरू करेंगे। इससे गांवों का विकास होगा और बिहार के लोगों को राज्य में ही रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।

    डीएनएस क्षेत्रीय सहकारिता प्रबंधन संस्थान में प्रशिक्षण कार्यक्रम

    बुधवार को उन्होंने दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारिता प्रबंधन संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर यह बात कही। कार्यक्रम में राज्य भर से चुने गए पैक्स और एफपीओ के 50 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

    इस मौके पर नीति आयोग की वरीय सलाहकार डॉ. बबीता सिंह ने कहा कि उनका सपना है कि बिहार के पैक्स व्यवसाय के क्षेत्र में आगे बढ़ें और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करें।

    उन्होंने बताया कि नीति आयोग 10 हजार एफपीओ के गठन की योजना पर काम कर रहा है, जिसके तहत कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

    व्‍यवसाय के रूप में देखी जा रही कृष‍ि 

    वहीं, भारत सरकार के त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, गुजरात की प्रोफेसर प्रीति प्रिया ने कहा कि अब कृषि को व्यवसाय के रूप में देखा जा रहा है, जो एक बड़ा बदलाव है।

    पैक्स अन्य विभागों की योजनाओं का लाभ उठाकर अपने व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    इस अवसर पर त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय, गुजरात के प्रो. अभिनव वर्मा और जीटी इंडिया के कंट्री हेड प्रो. वी. पद्मानंद ने भी अपने विचार व्यक्त किए।