बिहार में Student Credit Card का बदला नियम, अब सिर्फ 2 लाख मिलेंगे; ज्यादा रकम के लिए करना होगा ये काम
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव किया गया है, अब छात्रों को अधिकतम दो लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलेगा। दो लाख से अधिक राशि के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर आवेदन करना होगा, और योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया है।

चार लाख की जगह अब सिर्फ दो लाख तक मिलेगा ऋण
HighLights
क्रेडिट कार्ड योजना में अब अधिकतम दो लाख का ऋण।
अधिक राशि के लिए पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर आवेदन।
समय पर भुगतान पर 30-40% ब्याज प्रोत्साहन मिलेगा।
जागरण संवाददाता, पटना। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। अब छात्रों को अधिकतम दो लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलेगा। इससे अधिक राशि के लिए राज्य के छात्र-छात्राओं को पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर आवेदन करना होगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। इसके अनुसार राज्य सरकार ने उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को आर्थिक मदद देने वाली बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को अगले पांच वर्षों के लिए विस्तार दिया है।
चार लाख की जगह अब सिर्फ दो लाख तक मिलेगा ऋण
यह 2031 तक प्रभावी रहेगा। अधिकतम दो लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण के लिए विद्यार्थियों को बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
छात्र-छात्राओं को जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र पर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन और आवेदन की जांच के बाद ही ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होगी।
बिहार राज्य शिक्षा वित्त निगम के माध्यम से अबतक अधिकतम चार लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता रहा है।
दो लाख से ज्यादा चाहिए तो PM-विद्यालक्ष्मी पोर्टल पर आवेदन
अब इसे घटाकर अधिकतम दो लाख रुपये कर दिया गया है। अधिसूचना के अनुसार शेष दो लाख रुपये या उससे अधिक के ऋण के लिए विद्यार्थियों को पीएम-विद्यालक्ष्मी पोर्टल का आवेदन करना होगा। जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्रों पर विद्यार्थियों को पोर्टल के माध्यम से आवेदन करने की मुफ्त सुविधा भी मिलेगी।
नए नियम की तारीख तय, पुराने आवेदनों पर नहीं पड़ेगा असर
संशोधित योजना को लोक वित्त समिति और मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है। नये नियम राजपत्र में अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगे।
पहले स्वीकृत आवेदनों का निष्पादन पुराने नियमों के अनुसार ही किया जायेगा। संशोधित योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक प्रभावी होगी।
चालू वित्तीय वर्ष के लिए 950 करोड़ रुपये मंजूर
चालू वित्तीय वर्ष के लिए 950 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी गई है। राज्य में उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को 28.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना और प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी केंद्रीय योजनाओं से भी जोड़ा गया है।
केंद्र की योजना से बाहर छात्रों को भी राज्य से मदद
केंद्र की संबंधित योजनाओं के दायरे में नहीं आने वाले पात्र विद्यार्थियों को राज्य सरकार की योजना के तहत सहायता उपलब्ध कराने का प्रविधान किया गया है।
ऋण की राशि के पुनर्भुगतान की अवधि को भी स्पष्ट किया गया है। दो लाख रुपये तक के ऋण के लिए अध्ययन एवं मोरेटोरियम अवधि के बाद अधिकतम तीन वर्ष में राशि चुकानी होगी।
चार से 10 लाख के ऋण के लिए 10 साल तक का समय
दो से चार लाख रुपये तक के ऋण को अधिकतम पांच वर्ष तथा चार से 10 लाख रुपये तक के ऋण को अधिकतम 10 वर्ष में चुकाना होगा।
लंबित और अनुत्पादक शिक्षा ऋणों के निस्तारण तथा वसूली में सुधार के लिए वन टाइम सेटलमेंट की व्यवस्था भी की जाएगी।
आवेदन, स्वीकृति, ऋण वितरण, निगरानी, पुनर्भुगतान और शिकायत निवारण की पूरी प्रक्रिया एकीकृत प्रणाली से संचालित होगी।
समय पर किस्त चुकाने पर 30 से 40 प्रतिशत ब्याज प्रोत्साहन
नयी व्यवस्था में समय पर शिक्षा ऋण चुकाने वाले विद्यार्थियों को 30 प्रतिशत ब्याज प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, छात्रा, दिव्यांग और मंगलामुखी लाभार्थियों को निर्धारित अवधि में भुगतान करने पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत यानी 40 प्रतिशत ब्याज प्रोत्साहन मिलेगा।
4.81 लाख से ज्यादा आवेदन स्वीकृत
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अबतक 4.81 लाख से अधिक आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
इनमें 4.15 लाख से अधिक विद्यार्थियों को करीब 8,865 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।
15,801 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किये गए हैं। राज्य और इसके बाहर के कुल 3,429 शिक्षण संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया है।
