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    बिहार में मठ-मंदिरों की जमीन बचाने के लिए बनेगा स्पेशल सेल, अवैध कब्जेदारों पर चलेगा सरकार का डंडा

    Updated: Fri, 29 May 2026 07:48 PM (IST)

    बिहार के मठों और मंदिरों की लाखों एकड़ जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में एक विशेष सेल का गठन किया जाएगा। ...और पढ़ें

    विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक। (सोशल मीडिया)

    विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक। (सोशल मीडिया)

    HighLights

    1. मठों-मंदिरों की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।

    2. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में विशेष सेल बनेगा।

    3. धार्मिक न्यास की भूमि की सुरक्षा राज्य की प्राथमिकता।

    राज्य ब्यूरो, पटना। मठों-मंदिरों की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में विशेष सेल बनेगा। शुक्रवार को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया।

    बैठक में धार्मिक न्यास, मठ, मंदिर, देवालय की भूमि की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को तेज करने तथा इसके लिए समन्वित तंत्र विकसित करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

    इसमें विधि मंत्री संजय सिंह टाइगर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष रणवीर नंदन, विधि विभाग के विशेष सचिव वैष्णव शंकर मल्होत्रा, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह एवं सीमा त्रिपाठी सहित राजस्व विभाग के अन्य वरीय अधिकारी शामिल थे।

    डॉ. जायसवाल ने कहा कि राज्यभर के धार्मिक न्यास, मठ, मंदिर एवं देवालय की लाखों एकड़ जमीन की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है।

    लंबे समय से आ रही थी शिकायत

    लंबे समय से कई धार्मिक न्यासों की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आती रही हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार , विधि विभाग तथा बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद को मिलाकर एक स्पेशल सेल का गठन किया जाएगा।

    यह सेल धार्मिक न्यास परिषद की भूमि से जुड़े मामलों की निगरानी, कानूनी कार्रवाई तथा अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को समन्वित रूप से संचालित करेगा।

    मंत्री ने कहा कि धार्मिक न्यास परिषद के ट्रिब्यूनल की ओर से जिन मामलों में अतिक्रमण हटाने के आदेश पारित किए जा चुके हैं, उनमें विशेष अभियान चलाकर जमीन को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए। संबंधित क्षेत्रों के अंचल अधिकारियों को इसकी जिम्मेवारी सौंपी जाएगी। 

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