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    बज्जिका और सुरजापुरी भाषा को मिलेगा नया मंच, बिहार में 2 नई अकादमियां होंगी स्थापित

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 06:58 AM (IST)

    बिहार में जल्द ही बज्जिका और सुरजापुरी भाषा की दो नई अकादमियां स्थापित होंगी, जिससे राज्य में कुल भाषा अकादमियों की संख्या आठ हो जाएगी। उच्च शिक्षा वि ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। फाइल फोटो

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। फाइल फोटो

    HighLights

    1. बिहार में बज्जिका और सुरजापुरी की दो नई अकादमियां।

    2. कुल भाषा अकादमियों की संख्या बढ़कर अब आठ होगी।

    3. नई बिहार राज्य भाषायी अकादमी नियमावली 2026 होगी लागू।

    दीनानाथ साहनी, पटना। बिहा में दो नई भाषा अकादमी स्थापित होंगी। इसमें एक बज्जिका भाषा की अकादमी होगी, जबकि दूसरी सुरजापुरी भाषा की अकादमी।

    उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित दो भाषा अकादमी संबंधी प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृति के लिए शीघ्र भेजा जाएगा।

    इस प्रकार राज्य में भाषा अकादमियों की संख्या छह से बढ़कर आठ हो जाएगी। इनमें संस्कृत अकादमी, मैथिली अकादमी, बांग्ला अकादमी, भोजपुरी अकादमी, मगही आदमी एवं अंगिका अकादमी शामिल हैं।

    उच्च शिक्षा विभाग के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि बज्जिका अकादमी और सुरजापुरी अकादमी का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इन भाषा अकादमियों की स्थापना की घोषणा नीतीश कुमार के मुख्यमंत्रित्व काल में हुई थी।

    2 करोड़ लोगों की है भाषा 

    बज्जिका भाषा वैशाली, मुजफ्फरपुर एवं समस्तीपुर जिले में बोली जाती है। यह आंशिक रूप से सीतामढ़ी एवं शिवहर में भी बोली जाती है। इस भाषा को बोलने वाले लोगों की संख्या करीब डेढ़ से दो करोड़ के बीच है। हालांकि, वर्ष 2001 की जनगणना में एक करोड़ 19 लाख लोगों ने बज्जिका को अपनी मातृभाषा के रूप में लिखाया था।

    दूसरी ओर सुरजापुरी भाषा पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार और सीमांचल क्षेत्रों में बोली जाती है। यह बिहार की सीमा से सटे पश्चिम बंगाल में भी बोली जाती है।

    इसे बोलने वालों की संख्या तकरीबन 30 लाख है। हालांकि, वर्ष 2011 की जनगणना में यह 22 लाख 56 हजार 228 लोगों की मातृभाषा के रूप में दर्ज है।

    भाषा अकादमियों के लिए लागू होगी नई नियमावली

    राज्य की भाषा अकादमियों के लिए एक ही नई नियमावली लागू होगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से बिहार राज्य भाषायी अकादमी नियमावली, 2026 को लागू करने की तैयारी है।

    इससे संबंधित उच्च शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर वित्त विभाग, विधि विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग ने स्वीकृति दे दी है। इस प्रस्ताव पर भी अब सिर्फ राज्य मंत्रिमंडल की स्वीकृति जल्द ली जाएगी।

    प्रस्तावित नियमावली के लागू करने के बाद सभी भाषा अकादमियों को मिलाकर बिहार राज्य भाषायी अकादमी अस्तित्व में आएगी। आठ भाषा अकादमियां अलग-अलग विभाग के रूप में उसका हिस्सा हो जाएंगी।

    कैसा होगा स्ट्रक्चर

    प्रस्तावित बिहार राज्य भाषायी अकादमी में एक अध्यक्ष होंगे। दो उप निदेशक होंगे। एक उप निदेशक के ऊपर प्रशासनिक कार्य होगा। दूसरे उपनिदेशक शैक्षणिक व शोध के जिम्मेदारी संभालेंगे। इन पदों पर बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।

    महत्वपूर्ण बात यह कि इन अकादमियों में नियमित कर्मचारियों के सभी पद मरणशील हो जाएंगे। इसके तहत वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की सेवानिवृति के बाद उनके पद भी स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

    नियमित कर्मचारियों की जगह आउटसोर्सिंग के आधार पर कर्मचारियों की सेवा ली जाएगी। प्रत्येक अकादमी में संबंधित भाषा के विशेषज्ञ की नियुक्ति होगी। उनकी न्यूनतम योग्यता स्नातकोत्तर होगी, पीएचडी और शोध व अनुसंधान में रुचि रखने वाले को वरीयता दी जाएगी। इसके लिए न्यूनतम योग्यता 25 वर्ष निर्धारित की गई है। भाषाई निदेशालय में दर्जन से अधिक कर्मियों के पदों का भी सृजन किया गया है।

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