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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 20, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar News: छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, बिहार को मिलेगा पहला सहकारिता महाविद्यालय; मंत्री ने दी जानकारी

    Updated: Sun, 20 Apr 2025 07:34 PM (IST)

    बिहार को जल्द ही अपना पहला सहकारिता महाविद्यालय मिलने वाला है। युवाओं के लिए डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे जिससे राज्य में प्रशिक्षित और प ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. युवाओं को डिग्री एवं डिप्लोमा कोर्स होंगे उपलब्ध
    2. डिग्री प्रोग्राम, दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम होंगे लागू
    3. राज्य में सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित एवं पेशेवर युवा मिलेंगे
    4. सहकारिता मंत्री के निर्देश पर तैयार हो रहा प्रस्ताव

    दीनानाथ साहनी, पटना। बिहार में सहकारिता महाविद्यालय को स्थापित करने की तैयारी हो रही है। इससे राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी, स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा, सामाजिक समावेशन भी बढ़ेगा और नवाचार और अनुसंधान में नए मानक स्थापित करने के अवसर मिलेंगे।

    यह महाविद्यालय सहकारिता क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। इस महाविद्यालय को गुजरात में स्थापित होने वाले त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय से संबद्ध किया जाएगा।

    सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने राज्य में सहकारिता महाविद्यालय को स्थापित करने संबंधी प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश अफसरों को दिया है।

    इसमें डिग्री प्रोग्राम, दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे जिससे सहकारी क्षेत्र को प्रशिक्षित एवं पेशेवर युवा मिलेंगे।

    सहकारिता विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पैक्सों में सचिव के पद हों या कोआपरेटिव बैंकों में नियुक्तियों का मामला हो, सभी में बिना किसी मान्य डिग्री के नियुक्तियां होती हैं, क्योंकि सहकारिता के क्षेत्र में अभी तक कोई मान्य डिग्री नहीं होती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

    त्रिभुवन सहकारिता विश्वविद्यालय में विशेष रूप से सहकारिता क्षेत्र के लिए डिग्री, डिप्लोमा और पीएचडी कोर्स बनाए जा रहे हैं।

    यूनिवर्सिटी बनने के बाद अब मानक डिग्री धारकों को ही पैक्सों में सचिव के पद हों या कोआपरेटिव बैंकों में नौकरी मिलेगी। नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

    जमीन पर मजबूत सहकारी खाका तैयार होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को धार मिलेगी। एक नया सहकारी कल्चर भी शुरू होगा।

    दस एकड़ भूमि पर निर्माण होगा यूनिवर्सिटी कैंपस

    विभागीय मंत्री के निर्देश के आलोक में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें महाविद्यालय के लिए दस एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। इसके लिए भूमि को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है।

    महाविद्यालय का भवन और कैंपस सहकारिता थीम पर निर्माण होगा। विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना गुजरात में की जा रही है, लेकिन पूरे देश की सहकारी संस्थाओं को इससे संबद्ध किया जाएगा।

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    पहले वर्ष में ही प्रत्येक जिले में कॉलेज और स्कूल को खोले जाएंगे। नई शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप दसवीं-12वीं के लिए भी कोर्स होंगे। इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी कोर्स का डिजाइन किया गया है।

    साथ ही पाठ्यक्रम में ई-लर्निंग कोर्स भी शामिल किए जाएंगे। युवाओं के लिए डिग्री, डिप्लोमा एवं पीएडी के पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे।

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