नर्सों की नेशनल रजिस्ट्री में बिहार बना देश का नंबर वन, 99.1% कर्मियों का हुआ पंजीकरण; दक्षिण के राज्य पिछड़े
नर्सिंग कर्मियों की नेशनल रजिस्ट्री में बिहार देश में सबसे आगे निकल गया है, जहां 99.1% कर्मियों का नामांकन हो ...और पढ़ें

देश के 31.78 लाख नर्सिंग कर्मी अब भी नेशनल रजिस्ट्री से बाहर
HighLights
बिहार ने 99.1% नर्सिंग कर्मियों का नामांकन कर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्य नामांकन में काफी पीछे हैं।
एनआरटीएस नर्सों को राष्ट्रीय पहचान और आसान नौकरी गतिशीलता प्रदान करता है।
राज्य ब्यूरो, पटना। नर्सिंग क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की मुहिम में बिहार ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नेशनल रजिस्ट्री में नर्सिंग कर्मियों के नामांकन के मामले में बिहार देश में सबसे आगे है। राज्य के 62,591 पंजीकृत नर्सिंग कर्मियों में से 62,020 का नामांकन नर्सेस रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एनआरटीएस) पर हो चुका है।
इस तरह बिहार में 99.1 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया है। खास बात यह है कि नर्सिंग व्यवस्था के लिए चर्चित दक्षिण भारतीय राज्य भी इस मामले में बिहार से काफी पीछे हैं। वहीं, झारखंड ने भी 90.7 प्रतिशत नामांकन के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है।
देश के 31.78 लाख नर्सिंग कर्मी अब भी नेशनल रजिस्ट्री से बाहर
राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर बिहार से बिल्कुल अलग है। देश में कुल 46.02 लाख पंजीकृत नर्सिंग कर्मियों में से केवल 14.24 लाख ही एनआरटीएस पर नामांकित हैं।
यानी करीब 31.78 लाख नर्सिंग कर्मी अब भी इस व्यवस्था से बाहर हैं। इस तरह देशभर में नामांकन का दायरा अभी लगभग एक तिहाई तक ही पहुंच पाया है।
अधूरी रजिस्ट्री का असर नर्सों की नौकरी, राज्य बदलकर काम करने और विदेश में रोजगार पाने की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है।
बिहार में सिर्फ 571 नर्सों का नामांकन बाकी
एनआरटीएस के राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 62,591 पंजीकृत नर्सिंग कर्मियों में 62,020 का नामांकन पूरा हो चुका है। अब केवल 571 कर्मियों का नामांकन बाकी है।
झारखंड में 27,160 पंजीकृत कर्मियों में से 24,640 नामांकित हैं और 2,520 का नामांकन शेष है। ओडिशा में 98,194 कर्मियों में से 78,244 का पंजीकरण हुआ है।
यहां कवरेज 79.7 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से पूर्वी भारत के राज्यों में एनआरटीएस नामांकन की बेहतर स्थिति सामने आती है।
कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य काफी पीछे
नर्सिंग व्यवस्था में अग्रणी माने जाने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रदर्शन एनआरटीएस नामांकन में अपेक्षाकृत कमजोर है। कर्नाटक में 5,58,851 पंजीकृत नर्सिंग कर्मियों में से केवल 82,194 नामांकित हैं।
यहां कवरेज महज 14.7 प्रतिशत है। तमिलनाडु में 4,76,264 पंजीकृत कर्मियों में से 57,084 का ही नामांकन हुआ है। यहां कवरेज 12 प्रतिशत है।
नगालैंड में भी 6,808 पंजीकृत कर्मियों में से केवल 1,024 नामांकित हैं। केरल में करीब 4.2 लाख पंजीकृत कर्मियों में से लगभग 1.5 लाख का नामांकन हुआ है।
सात साल पहले शुरू हुई थी डिजिटल रजिस्ट्री की पहल
भारतीय नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी) ने करीब सात वर्ष पहले एनआरटीएस की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देशभर के नर्सिंग कर्मियों का एक लाइव राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करना और पंजीकरण से जुड़ी सेवाओं को एक ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराना है।
इसके माध्यम से प्राथमिक पंजीकरण, नवीनीकरण, पारस्परिक पंजीकरण और उच्च योग्यता दर्ज कराने जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इस पर नामांकन पूरी तरह नि:शुल्क है।
पंजीकरण के बाद नर्सों को डिजिटल पासबुक भी जारी की जाती है, जिसमें उनकी शैक्षणिक योग्यता और पेशेवर अनुभव का विवरण रहता है।
एनयूआइडी कार्ड से मिलेगी देशभर में पहचान
एनआरटीएस पर नामांकन के बाद प्रत्येक नर्स को 15 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या यानी एनयूआइडी कार्ड दिया जाता है। यह कार्ड नर्स की राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणिक पहचान के रूप में काम करता है।
इसके माध्यम से देश के किसी भी हिस्से में उनकी योग्यता और पंजीकरण का सत्यापन किया जा सकता है। इससे फर्जी दस्तावेजों और एक ही व्यक्ति के नाम पर दोहरे रिकॉर्ड की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है।
नौकरी के लिए राज्य बदलना और एनओसी लेना होगा आसान
एनआरटीएस का एक बड़ा लाभ नर्सिंग कर्मियों को नौकरी के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के दौरान मिलेगा। पहले पारस्परिक पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने में लंबा समय लग सकता था।
अब पोर्टल के माध्यम से इन प्रक्रियाओं को आसान और तेज बनाने का प्रावधान है। हालांकि, देश के बड़े हिस्से में नामांकन अधूरा रहने के कारण कई नर्सों को अभी भी एनओसी और क्रेडेंशियल वेरिफिकेशन के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है। विदेश में नौकरी तलाशने वाले नर्सिंग कर्मियों को भी इसका असर झेलना पड़ रहा है।
सतत नर्सिंग शिक्षा से कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा
एनआरटीएस से जुड़ने पर नर्सिंग कर्मियों को सतत नर्सिंग शिक्षा यानी कंटीन्यूइंग नर्सिंग एजुकेशन (सीएनई) का लाभ भी मिलता है। पहली बार एनयूआइडी कार्ड प्राप्त करने वालों को 30 घंटे की सीएनई शिक्षा का प्रोत्साहन दिया जाता है।
वहीं, प्रत्येक पांच वर्ष में नर्सिंग लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 150 घंटे की सीएनई शिक्षा की बाध्यता बताई गई है। इसका उद्देश्य नर्सों को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे बदलावों और नई तकनीकों से लगातार अपडेट रखना है।
स्वास्थ्य व्यवस्था की योजना बनाने में भी मिलेगी मदद
नेशनल रजिस्ट्री का लाभ केवल नर्सिंग कर्मियों तक सीमित नहीं है। इससे सरकार और स्वास्थ्य क्षेत्र के नीति निर्माताओं को देश में उपलब्ध नर्सिंग मानव संसाधन का सटीक आंकड़ा मिल सकेगा।
किस राज्य में कितने प्रशिक्षित नर्सिंग कर्मी उपलब्ध हैं और कहां उनकी जरूरत अधिक है, इसका आकलन आसान होगा। आपदा और स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान भी नर्सिंग कार्यबल का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा।
ऐसे में बिहार का 99.1 प्रतिशत नामांकन स्वास्थ्य क्षेत्र के डिजिटल रिकॉर्ड और मानव संसाधन प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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