बिहार के विश्वविद्यालयों में अब डिग्री के साथ रोजगार की तैयारी, इसी सत्र से शुरू होंगे IIT-IIM मॉडल पर नए कोर्स
बिहार के विश्वविद्यालयों में अब IIT-IIM मॉडल पर आधारित नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसी सत्र से लागू होने वाले ये कोर्स युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाएंगे।

बिहार के विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे रोजगारपरक कोर्स।
HighLights
नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम IIT-IIM मॉडल पर आधारित होंगे।
राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसी सत्र से लागू होंगे।
युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा देकर आत्मनिर्भर बनाना लक्ष्य।
दीनानाथ साहनी, पटना। बिहार में अब उच्च शिक्षा के नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बनेंगे।
राज्य में बढ़ती बेरोजगारी चिंता का विषय है। इसे देखते हुए सरकार की ओर से कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, लेकिन इससे बेरोजगारी की समस्या पर अपेक्षित अंकुश नहीं लग पा रहा है।
ऐसे में राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने निर्देश दिया है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने वाले पाठ्यक्रम लागू करें।
विशेषज्ञों की कमेटी ने कोर्स को दिया अंतिम रूप
विशेषज्ञों की गठित कमेटी ने प्रस्तावित नए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया है। इन्हें जल्द ही राज्यपाल की स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
स्वीकृति के बाद इन्हें चालू शैक्षणिक सत्र में ही लागू किया जाएगा। इसके लिए राज्यपाल सचिवालय की ओर से कुलपतियों के लिए गाइडलाइन भी तैयार की गई है।
नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम तैयार करने में IIT, IIM, निफ्ट, केंद्रीय विश्वविद्यालय और एमिटी यूनिवर्सिटी समेत अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के पाठ्यक्रमों को आधार बनाया गया है।
इन पाठ्यक्रमों के तहत डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की जाएगी। इससे युवाओं में रोजगारपरक शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने की उम्मीद है।
राज्यपाल सचिवालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि आवश्यकता के अनुसार दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से भी रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
- ऑनलाइन शिक्षा में कौशल आधारित रोजगारपरक नवीन विषयों की पहल
- राज्यपाल सचिवालय के विशेषज्ञों की कमेटी ने तैयार किया वोकेशनल कोर्स
- राजयपाल व कुलाधिपति से जल्द दी जाएगी नए पाठ्यक्रमों को स्वीकृति
- चालू शैक्षणिक सत्र में ही लागू कराने की हो रही तैयारी, गाइडलाइन भी तैयार
- प्रदेश भर में खुलेंगे ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी के भी द्वार
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वावलंबी बनाना है। कुशल मानव संसाधन से ही देश की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है। ऐसे में कौशल आधारित शिक्षा आज के समय की जरूरत बन चुकी है। इसी दृष्टि से नए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।
आने वाले समय में राज्य में ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी की स्थापना की संभावना भी है। इसका संचालन निजी क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इससे युवाओं के लिए वैश्विक स्तर के अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रमों में नामांकन लेना आसान होगा।
विजुअल क्लासरूम और इंटरैक्टिव लर्निंग को मिलेगा बढ़ावा
नवीन व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू होने के बाद विजुअल क्लासरूम लर्निंग, इंटरैक्टिव ऑनसाइट लर्निंग और वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को घर बैठे बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
सूचना क्रांति के दौर में तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।
सभी विश्वविद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में नवाचार और शोध कार्य को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बेहतर और कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
युवाओं को मिल रही शिक्षा से रोजगार मिलना चाहिए। युवा स्वयं रोजगार के लिए सक्षम हों, इसके लिए विश्वविद्यालयों में पारंपरिक पाठ्यक्रमों के साथ रोजगारपरक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। इस दिशा में राज्यपाल की पहल सराहनीय है। समय की मांग को देखते हुए तकनीकी ज्ञान आधारित नवीन पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने से बेरोजगारी में कमी आएगी। इसके लिए विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रमों की पंचवर्षीय योजना का प्रारूप तैयार होना चाहिए और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी की जानी चाहिए।
डाॅ. रासबिहारी सिंह, पूर्व कुलपति, पटना विश्वविद्यालय

