विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रमोशन के नियम बदले: साल में 2 बार होगी परीक्षा, तय सर्विस पीरियड पूरी करना जरूरी

Published: Tue, 08 Sep 2026 07:41 AM (IST)

बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब ...और पढ़ें

बिहार विश्वविद्यालय। फाइल फोटो

बिहार विश्वविद्यालय। फाइल फोटो

HighLights

  1. प्रोन्नति और सेवा संपुष्टि के लिए साल में दो बार परीक्षा।

  2. ग्रेड-पे पार कर सीधे ऊंचे पद पर जाने की अनुमति नहीं।

  3. प्रोन्नति के लिए न्यूनतम पांच वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के नियम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित होगी।

राज्यपाल सैयद अता हसनैन के दिशा-निर्देश पर बिहार लोक भवन ने कर्मचारियों की सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति से संबंधित ड्राफ्ट में नए प्रविधान किए गए हैं, जिसे सभी कुलपतियों और कुलसचिवों को उपलब्ध कराया गया है।

प्रोन्नति में ग्रेड-पे पारकर सीधे ऊंचे पद पर जाने की अनुमति नहीं

ड्राफ्ट में किए गए प्रविधान के मुताबिक राज्य के विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की प्रोन्नति में ग्रेड-पे पारकर सीधे ऊंचे पद पर जाने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें क्रमिक प्रोन्नति की संचयी अवधि पूरी करनी होगी।

प्रोन्नति के लिए संवर्ग के पिछले निचले पद पर कम से कम पांच वर्ष की निरंतर सेवा अनिवार्य होगी। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि सेवा संपुष्टि और प्रोन्नति के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर वर्ष में दो बार विभागीय परीक्षा आयोजित की जायेगी।

परीक्षा दो पत्रों की होगी और प्रत्येक पत्र 100 अंकों का होगा। परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

पहले पत्र में हिंदी टिप्पणी एवं प्रारूपण, वित्त एवं लेखा, क्रय प्रक्रिया, सेवा नियमावली, कार्यालय प्रबंधन, बजट और कंप्यूटर से जुड़े विषय शामिल होंगे। दूसरे पत्र में विश्वविद्यालय अधिनियम, परिनियम, विनियम, अध्यादेश और सरकारी संकल्प से संबंधित सवाल पूछे जायेंगे।

साक्षात्कार के लिए अधिकतम 50 अंक निर्धारित किये गये हैं। मेधा सह वरीयता प्रोन्नति का मुख्य आधार होगा। प्रोन्नति केवल विभागीय परीक्षा पास करने से नहीं मिलेगी। इसके लिए कर्मचारी की पिछले तीन वर्षों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट, विभागीय परीक्षा में प्राप्त अंक और साक्षात्कार के प्रदर्शन को देखा जायेगा।

कर्मचारियों को 2 इकाइयों में रखने की व्यवस्था

राज्यपाल सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रोन्नति की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए कर्मचारियों को दो इकाइयों में रखा जाएगा। विश्वविद्यालय कार्यालय और स्नातकोत्तर विभागों को पहली इकाई माना जाएगा, जबकि सभी अंगीभूत महाविद्यालय दूसरी इकाई के अंतर्गत आएंगे।

नए नियमों में कर्मचारियों के लिए नियंत्री पदाधिकारी भी स्पष्ट किए गए हैं। कुलसचिव विश्वविद्यालय कार्यालय के पदाधिकारियों, सचिवीय और चतुर्थवर्गीय कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे। प्रधानाचार्य संबंधित महाविद्यालय के सभी शिक्षकों और कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे।

विभागाध्यक्ष व संस्थान प्रधान स्नातकोत्तर विभागों और संस्थानों के कर्मियों के नियंत्री पदाधिकारी होंगे। कुलपति, कुलसचिव के नियंत्री पदाधिकारी होंगे। प्रोन्नति कोटे के पदों के लिए यदि पात्र कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो उन्हें भरने के लिए दो बार प्रयास किया जाएगा।

इसके बाद भी पात्र उम्मीदवार नहीं मिलने पर बचे हुए पदों को कुलपति की सहमति से खुली सीधी भर्ती के कोटे में स्थानांतरित किया जा सकेगा। इस प्रविधान से लंबे समय तक खाली रहने वाले पदों के भरने का रास्ता खुलेगा।

यह भी पढ़ें- बिहार में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे 400 हॉस्टल, डीएम-एसपी को मिले कार्रवाई के आदेश