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फ्रिज-एसी या लाखों के तोहफे पर 52 परतों वाला इस मिठाई के बिना शादी अधूरी, अनंत सिंह की बेटी के विवाह में भी रहेगी धूम

Published: Sat, 07 Nov 2026 03:37 PM (IST)

बिहार में शादी-ब्याह में महंगे तोहफों के साथ नालंदा का सिलाव खाजा एक अनिवार्य परंपरा है, जो रिश्तों की मिठास ...और पढ़ें

खाजा की टोकरी का रुतबा अलग

खाजा की टोकरी का रुतबा अलग

HighLights

  1. बिहार में शादी-ब्याह में खाजा एक अनिवार्य परंपरा।

  2. अनंत सिंह की बेटी की शादी में भी खाजा की मिठास।

  3. सिलाव का खाजा 52 परतों में पारंपरिक रूप से तैयार होता है।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में शादी-ब्याह का मतलब सिर्फ महंगे तोहफे, शानदार सजावट और तरह-तरह के पकवान नहीं है। यहां कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जिनकी जगह कोई दूसरी चीज नहीं ले सकती। इन्हीं में से एक है नालंदा के सिलाव का मशहूर खाजा। शादी में दूल्हे के घर तिलक पहुंचे या बारात लड़की के दरवाजे पर आए, खाजा की टोकरी साथ होना जरूरी माना जाता है। अब बाहुबली विधायक अनंत सिंह की बेटी शिवांगी की शादी की चर्चा है तो इस पारंपरिक मिठाई का जिक्र भी लाजिमी है।

लाखों के तोहफे अपनी जगह, खाजा की टोकरी का रुतबा अलग

बिहार में तिलक के दौरान लड़के वालों के घर पहुंचने वाले सामानों की लंबी सूची होती है। इसमें कपड़े, गहने, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी कई चीजें शामिल होती हैं। लेकिन इन सबके बीच खाजा की टोकरी का अपना अलग महत्व है। अगर तिलक में खाजा नहीं पहुंचा तो मेहमानों के बीच इसकी चर्चा जरूर हो सकती है।

दरअसल, खाजा सिर्फ खाने की मिठाई नहीं, बल्कि रिश्तेदारी निभाने की परंपरा का हिस्सा है। इसे आस-पड़ोस, रिश्तेदारों और गोतिया के घर बैना के रूप में भेजा जाता है। यही वजह है कि शादी के मौके पर इसकी मांग अचानक बढ़ जाती है।

अनंत सिंह की बेटी की शादी में भी दिखेगी सिलाव के खाजा की मिठास

अनंत सिंह की बेटी शिवांगी की शादी ऋषिकेश सिंह से होनी है। ऐसे में बिहार की पारंपरिक शादी की रस्मों के बीच खाजा का जिक्र भी खास है। तिलक से लेकर विवाह और विदाई तक खाजा की टोकरी रिश्तों की मिठास बढ़ाने वाली परंपरा का हिस्सा होती है।

लड़की वाले हों या लड़के वाले, दोनों पक्षों में खाजा भेजने का चलन है। बारात के साथ भी यह मिठाई पहुंचती है और विदाई के समय दूल्हे को भी ससुराल से खाजा दिया जाता है। यानी शादी के कई पड़ावों पर इस मिठाई की मौजूदगी बनी रहती है।

52 परतें और कुरकुरापन, तभी कहलाता है सिलाव का खाजा

बिहार में मिठाइयों की लंबी सूची है। बड़हिया का रसगुल्ला, पटना का लौंगलता और चंद्रकला जैसे स्वाद लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। लेकिन सिलाव के खाजा की पहचान ही अलग है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी परतें हैं। इसे पारंपरिक तरीके से करीब 52 परतों में तैयार किया जाता है।

मैदा, गेहूं का आटा, घी या रिफाइंड, चीनी, सौंफ और इलायची इसके प्रमुख ingredients हैं। आटे को गूंथने के बाद बेहद पतली परतें बनाई जाती हैं। इन्हें एक के ऊपर एक रखकर तैयार किया जाता है और फिर तेल या घी में तला जाता है। आखिर में चीनी की चाशनी में डुबोकर खाजा तैयार होता है।

घर के हलवाई के बस की बात नहीं, अलग होते हैं इसके कारीगर

शादी में रसगुल्ला, गुलाबजामुन और दूसरी मिठाइयां हलवाई से बनवाई जा सकती हैं, लेकिन खाजा तैयार करना अलग हुनर का काम है। इसकी परतों को सही तरीके से बनाना और तलने के दौरान कुरकुरापन बरकरार रखना आसान नहीं होता। यही कारण है कि खाजा बनाने वाले कारीगरों की अलग पहचान है।

नालंदा के सिलाव में पीढ़ियों से इस मिठाई को बनाने का काम होता रहा है। अब पटना में भी खाजा की कई दुकानें और कारीगर अपनी पहचान बना चुके हैं। राजधानी में जादूघर के आसपास भी इसकी दुकानें मिल जाती हैं।

मीठा ही नहीं, नमकीन खाजा भी है खास

खाजा की खासियत यह भी है कि यह सिर्फ मीठे स्वाद तक सीमित नहीं है। इसे नमकीन रूप में भी तैयार किया जाता है। हालांकि शादी-ब्याह और तिलक में मीठे खाजा की मांग ज्यादा रहती है। इसकी सूखी बनावट और लंबे समय तक टिकने की क्षमता इसे उपहार के लिए भी उपयुक्त बनाती है।

यही वजह है कि बिहार की शादियों में खाजा की टोकरी महज मिठाई नहीं, बल्कि रिश्तों और परंपराओं की मिठास का प्रतीक बन चुकी है।

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