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    बिहार: 48 साल बाद लौटी पत्नी, मगर साथ लाई सस्पेंस; पति बोला- अगर मेरे 2 बेटे हैं तो उनको लेकर आओ

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 06:59 PM (IST)

    बख्तियारपुर के बरियारपुर गांव में 48 साल बाद एक महिला अपने पति ललन मिश्रा के घर लौटी, खुद को उनकी पत्नी बताया और साथ रहने की इच्छा जताई। ...और पढ़ें

    48 साल बाद लौटी पत्नी, मगर साथ लाई सस्पेंस

    48 साल बाद लौटी पत्नी, मगर साथ लाई सस्पेंस

    HighLights

    1. महिला 48 साल बाद पति के घर लौटी, साथ रहने की इच्छा।

    2. पति ने बेटों के प्रमाण और कहानी पर संदेह जताया।

    3. मामले में कई अनसुलझे सवाल, रहस्य गहराया।

    जागरण नेटवर्क, बख्तियारपुर। प्रखंड के बरियारपुर गांव में बीते बुधवार को करीब 48 वर्षों से पति से अलग रह रही एक महिला पुलिस के साथ ललन मिश्रा के आवास पर पहुंची। घर पहुंचकर निर्मला मिश्रा नामक इस उम्रदराज महिला ने खुद को ललन मिश्रा की पत्नी बताया। इस घटना की सूचना मिलते ही परिवार के लोग और पड़ोसी हैरान रह गए।

    कौतूहल के बीच हर कोई इस बारे में जानकारी जुटाने में लग गया। हालांकि, ललन मिश्रा अपनी पत्नी से सवाल-जवाब करने में इस कदर उलझे रहे कि महिला को घर आए 7 दिन बीत जाने के बाद भी दंपति के बीच कहीं कोई आपसी प्रेम नजर नहीं आया।

    इस संबंध में दंपति से बातचीत करने पर महिला ने बताया कि वह अपने मायके के बुजुर्गों की सलाह पर यहां आई है और अब पति के साथ ही जीवन बिताना चाहती है।

    उसने बताया कि शादी के 6 महीने बाद वह यहां से अपने मायके चली गई थी, जहां उसने जुड़वां बेटों को जन्म दिया। अब दोनों बेटे बड़े हो चुके हैं। महिला ने यह भी बताया कि वह नागपुर (महाराष्ट्र) के किसी स्कूल में नौकरी करती है और पति से मिलकर वापस अपनी नौकरी पर लौटना चाहती है।

    'मुझे भी बुढ़ापे में कोई अंतिम संस्कार करने वाला मिल जाएगा'

    दूसरी ओर, बेटों के बारे में पूरी जानकारी न देने, मोबाइल नंबर या पहचान पत्र न दिखाने और फिर से वापस लौटने की बात सुनकर ललन मिश्रा भड़क जाते हैं। उनका कहना है, "जो हो गया, सो हो गया। अब यदि मेरे दो बेटे हैं, तो पत्नी उन्हें अपने साथ लेकर आए। मुझे भी बुढ़ापे में अंतिम संस्कार करने वाला मिल जाएगा।"

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    बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि यह महिला उन्हीं की पत्नी है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मुझे न तो इसके मूल मायके का पता है और न ही बच्चों के बारे में कोई जानकारी; तो फिर इसकी हर बात को सच मानकर मैं एकतरफा फैसला कैसे ले लूं?"

    हालांकि, पड़ोसी और मिश्रा जी की भाभी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। महिला की जेठानी ही फिलहाल उसे भोजन आदि उपलब्ध करा रही हैं।

    घटना को लेकर सस्पेंस क्यों है?

    इस पूरे मामले में कुछ पहेलियां अब भी अनसुलझी हैं। जैसे कि एक कामकाजी महिला बिना मोबाइल फोन के नागपुर से मिर्जापुर (यूपी) स्थित अपने मायके और फिर वहां से यहां तक कैसे पहुंच गई? महिला के पास कोई लिखित पहचान पत्र, या दोनों जुड़वां बेटों से जुड़ा कोई दस्तावेजी प्रमाण या तस्वीर क्यों नहीं है?

    यदि महिला शादी के 6 महीने बाद, आज से 47 वर्ष पहले घर छोड़कर गई थी और उस समय उसकी उम्र 13 वर्ष भी रही होगी, तो आज करीब 60 वर्ष बीत जाने के बाद भी वह नौकरी में कैसे बनी हुई है?

    ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो ललन मिश्रा को भी परेशान कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इनकी शादी बैकटपुर मंदिर में हुई थी और मिश्रा जी को अपने ससुराल के पते की भी कोई जानकारी नहीं है।