बिहार में सुरक्षित मातृत्व की ओर बड़ा कदम, अस्पताल पहुंच रहीं अधिक गर्भवती; संस्थागत प्रसव बढ़कर 81.1 प्रतिशत
बिहार में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जहाँ संस्थागत प्रसव बढ़कर 81.1 प्रतिशत हो गए हैं। ...और पढ़ें

प्रसव के बाद माताओं की देखभाल भी बेहतर
HighLights
बिहार में संस्थागत प्रसव 81.1% हुआ, सुरक्षित मातृत्व में सुधार।
पहली तिमाही एएनसी कवरेज 63.9% हुआ, गर्भवती महिलाओं की पहुंच बढ़ी।
प्रसवोत्तर देखभाल और नवजात शिशु देखभाल में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
राज्य ब्यूरो,पटना। बिहार में सुरक्षित मातृत्व की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले की तुलना में अधिक गर्भवती महिलाएं अस्पतालों तक पहुंच रही हैं। समय पर जांच, संस्थागत प्रसव और प्रसव के बाद देखभाल की बेहतर व्यवस्था से जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की निगरानी मजबूत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अस्पताल में प्रसव कराने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है।
तीन वर्षों में करीब पांच प्रतिशत बढ़ा संस्थागत प्रसव
बिहार में संस्थागत प्रसव का अनुपात बढ़कर 81.1 प्रतिशत हो गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले सर्वेक्षण में यह अनुपात 76.2 प्रतिशत था।
करीब तीन वर्षों में लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी
गर्भावस्था के शुरुआती चरण में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहली तिमाही में एएनसी कराने वाली महिलाओं का अनुपात 52.9 प्रतिशत से बढ़कर 63.9 प्रतिशत हो गया है।
वहीं किसी न किसी एएनसी सेवा से जुड़ने वाली महिलाओं का कवरेज 81.6 प्रतिशत से बढ़कर 94 प्रतिशत हो गया है।
नियमित जांच तक पहुंच में हुआ सुधार
आंकड़े बताते हैं कि गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच तक पहुंच में सुधार हुआ है। शुरुआती एएनसी से लेकर अस्पताल में प्रसव और प्रसव के बाद की देखभाल तक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ाव बढ़ा है। इससे गर्भावस्था के दौरान संभावित स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान और देखभाल में मदद मिल सकती है।
प्रसव के बाद माताओं की देखभाल भी बेहतर
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का असर प्रसवोत्तर देखभाल में भी दिखाई दे रहा है। प्रसव के दो दिनों के भीतर माताओं को प्रसवोत्तर देखभाल मिलने का अनुपात 57.3 प्रतिशत से बढ़कर 69.9 प्रतिशत हो गया है। इसी अवधि में नवजात शिशुओं की देखभाल का अनुपात भी 59.3 प्रतिशत से बढ़कर 76.2 प्रतिशत हुआ है।
गर्भावस्था से प्रसवोत्तर देखभाल तक बढ़ा जुड़ाव
पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि परिमल झा के अनुसार, इन आंकड़ों को केवल प्रसव के आंकड़े के तौर पर नहीं देखना चाहिए। गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद तक महिला का स्वास्थ्य सेवाओं से लगातार जुड़े रहना महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, एएनसी, संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल में एक साथ सुधार स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता मजबूत होने का संकेत है।
सरकारी अस्पतालों की भूमिका अहम
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। राज्य में 57.5 प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए हैं।
ग्रामीण बिहार में सरकारी संस्थानों में प्रसव का अनुपात 58.4 प्रतिशत है। स्वास्थ्य विभाग इसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती पहुंच का सुखद संकेत मान रहा है।
