शुगर और बीपी कंट्रोल रखना क्यों है जरूरी? डॉक्टर ने बताए गंभीर खतरे और समाधान
बदलती जीवनशैली के कारण ब्लड प्रेशर और डायबिटीज साइलेंट किलर बन रहे हैं, जो बिहार में बड़ी आबादी को प्रभावित कर रहे हैं। समय पर जांच और नियंत्रण से हृद ...और पढ़ें

पाठकों के प्रश्नों के जवाब देते डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह। जागरण
जागरण संवाददाता, पटना। बदलती जीवनशैली, तनाव, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण ब्लड प्रेशर (बीपी) और डायबिटीज तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं।
ये दोनों बीमारियां “साइलेंट किलर” हैं, क्योंकि शुरुआती दौर में इनके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते, लेकिन धीरे-धीरे ये हृदय, किडनी, आंख और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।
बिहार में 15 वर्ष से अधिक आयु के 17 प्रतिशत को हाई ब्लडप्रेशर
बिहार में भी गैर संचारी रोगों (एनसीडी) का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। बिहार सरकार की एनपीसीडीसीएस रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के करीब 17.15 प्रतिशत लोग हाई ब्लड प्रेशर और 14.45 प्रतिशत लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं।
बड़ी संख्या में लोगों को यह तक पता नहीं होता कि वे बीपी या शुगर की बीमारी से ग्रसित हैं। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, बार-बार प्यास लगना, धुंधला दिखाई देना, पैरों में झनझनाहट और वजन कम होना शुगर व हाई बीपी के संकेत हो सकते हैं।
हालांकि कई मरीजों में लंबे समय तक कोई लक्षण नहीं दिखते, इसलिए नियमित जांच ही सबसे बड़ा बचाव है। यह बातें दैनिक जागरण के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘हेलो जागरण’ में लोक स्वास्थ्य संस्थान, पटना के निदेशक सह फिजिशियन-डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहीं।
इस दौरान उन्होंने पाठकों के सवालों के जवाब भी दिए। प्रस्तुत हैं प्रमुख प्रश्न और उनके उत्तर।
बीपी व शुगर की जांच किस उम्र से करानी चाहिए?
:: संजय सिंह, आरा
- 30 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। इसके साथ ही नमक और चीनी का सीमित सेवन, रोजाना व्यायाम, तनाव नियंत्रण, पर्याप्त नींद और धूम्रपान-शराब से दूरी बीमारी को नियंत्रित रखने में मदद करती है।
बीपी व शुगर के अनियंत्रित होने से क्या हो सकता है?
:: प्रियंका कुमारी, हाजीपुर
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- अनियंत्रित बीपी से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का खतरा बढ़ जाता है, जबकि अनियंत्रित शुगर आंखों की रोशनी, किडनी और नसों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में इसे नजरअंदाज न करें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं, क्योंकि समय पर पहचान और नियंत्रण से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
बीपी व शुगर का सामान्य रेंज क्या होना चाहिए?
:: शशि कपूर, लखनऊ
- सामान्य तौर पर स्वस्थ व्यक्ति के लिए ब्लड प्रेशर का स्तर 120/80 के आसपास होना चाहिए। 140/90 या उससे अधिक होने पर हाई बीपी और 90/60 होने पर लो बीपी माना जाता है।
ब्लड शुगर का सामान्य स्तर खाली पेट 70 से 99 एमजी/डीएल और खाना खाने के बाद 140 एमजी/डीएल से कम होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष की उम्र के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार बीपी और शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए।
बीपी व शुगर की दवा शुरू होने के बाद, नियंत्रण में आने पर क्या बंद कर सकते हैं?
:: ऊषा पांडेय, आरपीएस मोड़
- बीपी (हाई ब्लड प्रेशर) और शुगर (डायबिटीज) की दवा अपने-आप बंद नहीं करनी चाहिए, भले ही रिपोर्ट सामान्य आने लगे। कई बार दवा, खानपान और जीवनशैली में सुधार की वजह से बीपी और शुगर नियंत्रित रहते हैं। दवा बंद करते ही स्तर फिर बढ़ सकता है। ऐसे में सामान्य होने पर डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा की मात्रा कम या एडजस्ट कराई जा सकती है।
सांस लेने में तकलीफ होती है, क्या करें?
:: सत्यनारायण सिंह चौहान, बख्तियारपुर
- सांस लेने में तकलीफ (शॉर्टनेस ऑफ ब्रीथ) कई कारणों से हो सकती है। कभी यह सामान्य कारणों से होती है, लेकिन कई बार यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। ऐसे में नजदीकी अस्पताल जाकर आवश्यक जांच जरूर कराएं।