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    गूगल पर डॉक्टर का नंबर ढूंढना पड़ा महंगा, पटना में व्यवसायी के खाते से 19.76 लाख रुपये साफ

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 06:21 AM (GMT+05:30)

    पटना में एक व्यवसायी गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजते हुए साइबर ठगी का शिकार हो गया, जिससे उसके बैंक खातों से 19.76 लाख रुपये निकाल लिए गए। ...और पढ़ें

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

    HighLights

    1. व्यवसायी ने गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजा, 19.76 लाख गंवाए।

    2. साइबर ठगों ने फर्जी प्रोफाइल और एपीके फाइल का उपयोग किया।

    3. फोन हैक कर तीन बैंक खातों से पैसे निकाले गए।

    जागरण संवाददाता, पटना। किसी भी फर्म, संस्था या डॉक्टर आदि का नंबर इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर ढूंढ़ रहे हैं तो सावधानी बरतें, अन्यथा साइबर ठगों के शिकार हो सकते हैं।

    ठगों ने इनके नाम पर फर्जी नंबर भी डाल रखे हैं, जिससे लोग झांसे में आ जा रहे। ऐसा ही एक मामला जक्कनपुर थाना क्षेत्र में आया है।

    साइबर ठगों ने जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन सिंह की क्लिनिक की फर्जी प्रोफाइल बना रखी थी, अपना नंबर भी दे रखा था। मीठापुर बी एरिया में रहने वाले व्यवसायी राजेश कुमार इसे समझ नहीं सके। इस पर विश्वास कर लिया।

    साइबर ठगों ने उनके तीन अलग-अलग बैंक खातों से कुल 19.76 लाख रुपये साफ कर दिए। पीड़ित कारोबारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले हैं और यहां इलेक्ट्रिक उपकरण फैब्रिकेशन का व्यवसाय करते हैं।

    उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। राजेश कुमार की मां के कंधे में गंभीर समस्या थी। उनके बेहतर उपचार के लिए उन्होंने गूगल पर पटना के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएन सिंह का मोबाइल नंबर खोजा।

    शातिर साइबर अपराधियों ने सर्च इंजन पर डॉक्टर के क्लिनिक के पते के साथ अपना मोबाइल नंबर जोड़ रखा था। राजेश ने उसी फर्जी नंबर पर कॉल लगा दी।

    फोन उठाने वाले बदमाश ने स्वयं को क्लिनिक का स्टाफ बताते हुए नंबर लगाने को पांच रुपये की आनलाइन फीस जमा करने को कहा।

    इसके लिए कारोबारी के मोबाइल पर एक लिंक भेजा और उसके माध्यम से एक एपीके फाइल डाउनलोड करने को कहा। जैसे ही राजेश ने उस फाइल को अपने फोन में इंस्टाल कर पांच रुपये का भुगतान किया, वैसे ही उनका पूरा मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ गया।

    एपीके फाइल की मदद से शातिरों ने पीड़ित के फोन का पूरा डेटा और बैंकिंग पासवर्ड क्लोन कर खाते से रुपये निकाल लिया।

    राजेश अपनी मां की बिगड़ती तबीयत के कारण बेहद परेशान थे और उन्हें तुरंत इलाज के लिए कंकड़बाग स्थित डॉ. आरएन सिंह के वास्तविक क्लिनिक लेकर पहुंचे। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया गया।

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    कारोबारी मां की देखभाल और अस्पताल की प्रक्रियाओं में व्यस्त रहे, जिसका फायदा उठाकर साइबर ठगों ने तीन अलग-अलग बैंक खातों में सेंध लगा दी।

    बदमाशों ने एक-एक कर कुल 18 बार में 19.76 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर कर ली। मोबाइल हैक होने के कारण पीड़ित को समय पर पैसों की निकासी के मैसेज भी नहीं मिल सके, जिससे उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी। फिलहाल साइबर थाना पुलिस ट्रांजेक्शन डिटेल्स के आधार पर जांच कर रही है।

    अनजान नंबर का लिंक न खोलें साइबर विशेषज्ञ यह बार-बार बता रहे हैं कि किसी भी अनजान नंबर या कहीं से भी प्राप्त लिंक या फाइल को कतई नहीं खोलें। यह साइबर फ्राड हो सकता है। साइबर अपराधी एपीके फाइल के माध्यम से आपके मोबाइल को हैक कर सकते हैं।

    रहें सतर्क

    कंकड़बाग के डॉक्टर का नंबर खोजा, 1.87 लाख की ठगी जून 2023 में दिल्ली के कारोबारी रवि भूषण ने बच्चे के उपचार के लिए कंकड़बाग के डॉ सुनील का नंबर गूगल से निकाला।

    कुछ देर बाद खुद को क्लिनिक का कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने क्यूआर कोड भेजा। स्कैन करते ही आठ बार में 1.87 लाख रुपये खाते से निकल गए।

    डॉ. मारुत नंदन कुमार के नाम पर 44 हजार रुपये की ठगी कंकड़बाग की अभिलाषा कुमारी ने डॉ. मारुत नंदन का नंबर गूगल से खोजा।

    कॉल नहीं लगने पर दूसरे नंबर से फोन करने वाले ने खुद को क्लिनिक का कर्मी बताते हुए 10 रुपये की ऑनलाइन फीस जमा कराने को कहा। लिंक पर क्लिक करते ही दो खातों से 44 हजार निकल गए।

    50 रुपये की फीस के बहाने पिछले साल दो लाख की ठगी 2025 में पटना के सतीश कुमार ने बच्चे के उपचार के लिए गूगल से डाक्टर का नंबर निकाला। कुछ देर बाद फोन आया और 50 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने के लिए लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करते ही छह ट्रांजैक्शन में करीब दो लाख रुपये निकल गए।

    जानिए कैसे जोड़ते हैं नंबर

    • डॉक्टर या क्लिनिक के नाम से फर्जी गूगल बिजनेस प्रोफाइल बना देते हैं। 
    • ऑनलाइन डायरेक्टरी और लोकल लिस्टिंग में मोबाइल नंबर जोड़ देते हैं। 
    • इंटरनेट मीडिया पर डाक्टर के नाम से फर्जी पेज बना नंबर प्रचारित करते हैं।
    • पुराने या बंद नंबर की जगह अपना नंबर अपडेट कर देते हैं शातिर।
    • कॉल आने पर खुद को रिसेप्शनिस्ट या क्लिनिक का स्टाफ बताते हैं।

    क्या करें

    • क्लिनिक की आधिकारिक वेबसाइट से नंबर का मिलान जरूर करें। 
    • डॉक्टर की आधिकारिक इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल या अस्पताल के रिसेप्शन से नंबर की पुष्टि करें। 
    • गूगल पर दिख रहे नंबर के साथ उपलब्ध रिव्यू, वेबसाइट और सत्यापित प्रोफाइल भी देखें।
    • संदेह होने पर सीधे अस्पताल के लैंडलाइन नंबर पर संपर्क करें।

    सही नंबर कैसे पहचानें

    • डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट लेने से पहले फाेन नंबर की पूरी तरह पुष्टि कर लें।
    • आधिकारिक वेबसाइट या अस्पताल से मिले नंबर पर ही बात करें। 
    • किसी भी ऑनलाइन भुगतान से पहले क्लिनिक से दोबारा पुष्टि करें। 
    • ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और 1930 पर कॉल कर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।

    क्या नहीं करें

    • वाट्सएप या एसएमएस से आए अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें l
    • किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन कर पैसों का भुगतान नहीं करें l
    • स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें l
    • ओटीपी, यूपीआइ पिन या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें।

    डॉक्टर का अप्वाइंटमेंट लेने के लिए सामान्यतः ओटीपी, यूपीआइ पिन, स्क्रीन शेयरिंग या क्यूआर कोड स्कैन कराने की जरूरत नहीं होती। ऐसी बातचीत आगे न बढ़ाएं। यदि कोई व्यक्ति इस तरह की मांग करता है तो उसे संदिग्ध मानें और तुरंत कॉल काट दें।

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    राजन कुमार, साइबर एक्सपर्ट