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Chaturmas 2026: शादी-मुंडन समेत सभी मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम, 25 जुलाई से निद्रा में जाएंगे भगवान विष्णु

Updated: Sat, 18 Jul 2026 06:51 PM (IST)

चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर चार महीने तक चलेगा, जिसमें शादी-विवाह जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ...और पढ़ें

चातुर्मास 2026। फाइल फोटो

चातुर्मास 2026। फाइल फोटो

HighLights

  1. 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ, मांगलिक कार्य स्थगित।

  2. भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में जाएंगे।

  3. देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर से फिर शुरू होंगे शुभ कार्य।

जागरण संवाददाता, पटना। मांगलिक कार्यों पर 25 जुलाई शनिवार से चार माह तक विराम लग जाएगा। 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ होने के कारण शादी-विवाह, मुंडन, जनेऊ, भूमि पूजन आदि कार्य नहीं हांगे। भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागृत होने के बाद देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्य आरंभ होगा।

चातुर्मास के बाद शहनाई की गूंज सुनाई देगी। कार्तिक शुक्ल एकादशी 20 नवंबर को श्रीहरि योग निद्रा से जागृत होंगे। पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी 25 जुलाई शनिवार को अनुराधा नक्षत्र व ज्येष्ठा नक्षत्र तथा ब्रह्म योग के सुयोग में एकादशी का व्रत साधु, संत, वैष्णव जन करेंगे।

एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान नारायण की पूजा कर उन्हें चार मास के लिए शयन करा दिया जाएगा। चार माह के दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर भजन-कीर्तन पर भगवान की सेवा में लगे रहेंगे।

चातुर्मास में प्रमुख व्रत त्योहार

चातुर्मास के दौरान सावन मास में सोमवारी, हरियाली तीज, मधुश्रावणी, नागपंचमी, पुत्रदा एकादशी, रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा। भाद्रपद मास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, हरितालिका तीज, गणेश चतुर्थी, राधाष्टमी, अनंत चतुर्दशी का पर्व होगा।

आश्विन मास में पितृपक्ष, जिउतिया व्रत, दुर्गा पूजा, कोजगरा, शरद पूर्णिमा का पर्व तो कार्तिक मास में धनतेरस, दीपावली, छठ महापर्व, अक्षय नवमी, देवोत्थान एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा का पर्व होगा।

प्रीति योग में गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा में 29 जुलाई शुक्रवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं प्रीति योग के शुभ संयोग में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। श्रद्धालु एवं शिष्य इस दिन अपने गुरुजनों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश के सदृश मानते हुए अपनी श्रद्धा के अनुरूप उनकी पूजा करेंगे।

इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व कृतज्ञता प्रकट किया जाएगा। सनातन धर्म मे गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। गुरु कृपा से ही शांति, आनंद व मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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