यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 17, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Chhath Puja 2023: दिल्ली समेत कई शहरों से भर-भरकर बिहार आ रहीं ट्रेनें, भीड़ इतनी कि शौचालय तक पहुंचना भी मुश्किल
Chhath Puja 2023 बिहार में छठ महापर्व शुरू हो चुका है। शहरों से भारी संख्या में भीड़ बिहार जा रही है। वर्तमान में ट्रेनों में इतनी ज्यादा भीड़ है कि ए ...और पढ़ें

HighLights
- दिल्ली से आने वाली ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं
- छठी मईया के मधुर संगीत बरबस खींच लाती है: यात्री
नीरज कुमार, पटना। छठ को लेकर ट्रेनों में भारी भीड़ है। दिल्ली, मुंबई, जयपुर, कोटा, अहमदाबाद, पुणे, कोलकाता सहित देश के विभिन्न शहरों से पटना जंक्शन पर आने वाली ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं है। काफी संख्या में बाहरी प्रदेशों से लोग छठ पूजा करने लिए आ रहे हैं।
पटना जंक्शन पर उतरने के बाद बसों एवं अन्य साधनों से अपने घर जा रहे हैं। वर्तमान में ट्रेनों में इतनी ज्यादा भीड़ है कि एक बार कोच में घुसने के बाद शौचालय तक पहुंचना भी मुश्किल है। लोग दरवाजे पर बैठकर भी किसी तरह अपने घर आ रहे हैं। आने वाले लोगों को कहना है कि छठी मैया के मधुर संगीत बरबस खींच लाती है।
'साल में एक बार छठ के समय गांव आता हूं'
दिल्ली में अपना कारोबार करने वाले छपरा के गुड्डू कुमार पटना जंक्शन पर उतरने के बाद कहा कि पिछले दस वर्षों से दिल्ली में रहकर अपना कारोबार करता हूं। मेरे माता-पिता गांव में रहते हैं। पति-पत्नी एवं दो बच्चों के साथ गुड्डू अपने गांव जा रहे हैं।
गुड्डू का कहना है कि साल में एक बार छठ के समय गांव आता हूं। मां छठ करती हैं। बुजुर्ग होने के कारण पत्नी का सहयोग बहुत जरूरी है। सबकुछ छठी माई की कृपा से चल रहा है। छठी माई की पूजा से बड़ा कोई काम नहीं हो सकता, इसलिए दस दिनों तक कारोबार बंद कर गांव जा रहा हूं।
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भीड़ की स्थिति किसी एक ट्रेन की नहीं
गरीब रथ से दिल्ली से आने वाले गुड्डू पहले व्यक्ति नहीं है, बल्कि हजारों लोग फिलहाल छठ करने के अपने-अपने घर लौट रहे हैं। पूरी ट्रेन भरी हुई है। ट्रेन पटना जंक्शन पर लगते ही उतरने वालों की होड़ लग गई। हर कोई जल्द से जल्द निकलना चाहता है।
इस तरह की स्थिति किसी एक ट्रेन की नहीं। संपूर्ण क्रांति, श्रमजीवी सहित अधिकांश ट्रेनों का यही हाल है। दिल्ली से आने वाले विकास राय पालीगंज के रहने वाले हैं। उनके गांव में भी छठ हो रहा है। विकास का कहना है कि छठ पूजा को सामान्य पूजा की तरह नहीं माना जा सकता है।
छठ पूजा के अवसर पर गांव के बाहर रहने वाले अधिकांश लोग आते हैं। सभी से मुलाकात हो जाती है। साथ ही शादी का सीजन होता है, वह भी काम इस दौरान हो जाता है। यह लोक संस्कृति है, यह लोगों के रग-रग में समाया है, इसके केवल त्योहार नहीं कहा जा सकता है। यह घर-घर का त्योहार है।