यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 19, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Chirag Paswan: 'इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए', UPSC में लेटरल एंट्री पर भड़के चिराग पासवान
संघ लोक सेवा आयोग में लेटरल एंट्री के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। अब चिराग पासवान ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। चिराग पासवान लेटरल एंट्री के मुद्दे प ...और पढ़ें

HighLights
- यूपीएससी में लेटरल एंट्री के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।
- चिराग पासवान ने लेटरल एंट्री को लेकर अपना स्टैंड साफ कर दिया है।
- चिराग पासवान ने कहा- इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं होना चाहिए
एजेंसी, नई दिल्ली/पटना। Chirag Paswan On UPSC Lateral Entry भाजपा के सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को आरक्षण का पालन किए बिना सरकारी पदों पर नियुक्तियों के किसी भी कदम की आलोचना की। चिराग ने कहा कि वह केंद्र के साथ लेटरल एंट्री का मुद्दा उठाएंगे।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष ने कहा, "किसी भी सरकारी नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान होना ही चाहिए। इसमें कोई किंतु-परंतु नहीं है। निजी क्षेत्र में कोई आरक्षण नहीं है और अगर सरकारी पदों पर भी इसे लागू नहीं किया जाता है... तो यह मेरे लिए चिंता का विषय है।"
'मैं इस तरह के कदम के समर्थन में नहीं हूं'
पासवान ने पीटीआई-भाषा से कहा कि सरकार के सदस्य के रूप में उनके पास इस मुद्दे को उठाने के लिए मंच है और वह इस मुद्दे को जरूर उठाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि जहां तक उनकी पार्टी का सवाल है, वह इस तरह के कदम के बिल्कुल भी समर्थन में नहीं है।
किस बात पर छिड़ा विवाद?
बता दें कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने पिछले शनिवार को अनुबंध के आधार पर लेटरल एंट्री मोड के माध्यम से भरे जाने वाले 45 पदों (संयुक्त सचिवों के 10 और निदेशकों/उप सचिवों के 35) का विज्ञापन दिया था।
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लेटरल एंट्री के मुद्दे पर सियासत तेज
विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना करते हुए दावा किया कि इससे एससी, एसटी और ओबीसी से आरक्षण छीन लिया जाएगा। भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि एनडीए सरकार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए द्वारा शुरू की गई भर्ती के इस तरीके में पारदर्शिता ला रही है।
वहीं, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने यह भी आरोप लगाया कि यह भाजपा द्वारा अपने वैचारिक सहयोगियों को पिछले दरवाजे से उच्च पदों पर नियुक्त करने की एक साजिश है।
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