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    दो बच्चों की मां, नौकरी भी... फिर बनीं SDM; पटना के किसान की बेटी की प्रेरक कहानी, भाई भी BPSC में सफल

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 03:32 PM (IST)

    बख्तियारपुर के किसान परिवार से रुचि रानी ने बीपीएससी में 260वीं रैंक हासिल कर एसडीएम का पद प्राप्त किया। उनके भाई आलोक अभिजीत ने भी 1182वीं रैंक के सा ...और पढ़ें

    बीपीएससी में सफल रुचि रानी और उनके भाई आलोक अभ‍िजीत। फाइल

    बीपीएससी में सफल रुचि रानी और उनके भाई आलोक अभ‍िजीत। फाइल

    HighLights

    1. रुचि रानी ने 260वीं रैंक के साथ एसडीएम पद हासिल किया।

    2. उनके भाई आलोक अभिजीत को बीपीएससी में 1182वीं रैंक मिली।

    3. नौकरी, परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर पाई सफलता।

    संवाद सूत्र, बख्तियारपुर। बिहार लोकसेवा आयोग (BPSC) की 20 जून को घोषित संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का परिणाम कई प्रेरक कहानियां लेकर आया है।

    इन्हीं में से एक कहानी पटना जिले के बख्तियारपुर के किसान परिवार की है, जहां भाई-बहन दोनों ने एक साथ सफलता हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया है।

    बख्तियारपुर निवासी किसान अशोक कुमार और सरस्वती शिशु मंदिर की आचार्य नीतू कुमारी के दो बच्चों ने बीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की है।

    बैंक अध‍िकारी भाई को 1182वीं रैंक 

    बेटी रुचि रानी ने 260वीं रैंक प्राप्त कर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) का पद हासिल किया है, जबकि बेटे आलोक अभिजीत, जो वर्तमान में बैंक ऑफ इंडिया में अधिकारी हैं, ने 1182वीं रैंक प्राप्त कर सफलता अर्जित की है।

    रुचि रानी की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने नौकरी, परिवार और पढ़ाई, तीनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाते हुए यह मुकाम हासिल किया।

    शादी नालंदा जिले के सरमेरा में हुई है। उनके पति एक निजी दवा कंपनी में प्रबंधक हैं। दंपती के दो बच्चे एक बेटा और एक बेटी हैं।

    रुचि ने अपने करियर की शुरुआत जीविका से की थी। इसके बाद उनका चयन पंचायती राज विभाग में हुआ। पिछले 11 वर्षों से वह नौकरी कर रही हैं।

    इस दौरान उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और बीपीएससी की तैयारी नहीं छोड़ी।

    उन्होंने बताया कि उनकी सफलता का सबसे बड़ा आधार टाइम मैनेजमेंट रहा। नौकरी के बाद बचे समय में नियमित अध्ययन, परिवार का सहयोग और निरंतर अभ्यास ने उन्हें लक्ष्य तक पहुंचाया।

    दो बार मिली असफलता, तीसरे प्रयास में मिली सफलता

    रुचि पिछले पांच वर्षों से बीपीएससी की तैयारी कर रही थीं। पहले प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा (प्री) तो पास कर ली, लेकिन मुख्य परीक्षा (मेंस) में सफलता नहीं मिली।

    दूसरे प्रयास में भी यही स्थिति रही। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी कमियों को दूर किया, तैयारी का तरीका बदला और तीसरे प्रयास में शानदार सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का सपना साकार कर लिया।

    रुचि की सफलता न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं, बल्कि नौकरीपेशा महिलाओं और गृहिणियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।  

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