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'हस्ताक्षर कर बिहार के हितों से समझौता किया, अब प्रवचन दे रहे', फरक्का समझौते पर संजय झा का RJD पर हमला

Published: Wed, 26 Aug 2026 02:50 PM (IST)

बिहार में फरक्का समझौते के नवीनीकरण को लेकर राजनीति गरमा गई है, जहां राजद के सवाल उठाने के बाद जदयू ने पलटवार किया है।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की नदियों में उफान के बीच फरक्का समझौते को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। राजद की ओर से सुप्रीमो लालू प्रसाद का वीडियो जारी कर सवाल उठाए जाने के बाद जदयू ने पलटवार किया है।

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने राजद पर निशाना साधते हुए समझौते के समय की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर सवाल खड़े किए।

'क‍िसने बिहार के हितों से क‍िया समझौता'

संजय झा ने पूछा कि जब फरक्का समझौता हुआ था, तब उस पर किसने हस्ताक्षर किए थे? उस समय बिहार के मुख्यमंत्री कौन थे और केंद्र में किसकी सरकार थी?

उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर कर बिहार के हितों से समझौता कर लिया गया और अब प्रवचन दिया जा रहा है। जब समझौता हो रहा था, तब इसे रोकने की कोशिश क्यों नहीं की गई?

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फरक्का समझौते को लेकर शुरू से ही अपनी बात रखते रहे हैं। उन्होंने संबंधित टीम को बुलाकर स्थिति से अवगत कराया।

अब भारत सरकार से भी आग्रह किया है कि बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में निर्णय लिया जाए। संजय झा ने कहा कि या तो फरक्का समझौते का नवीनीकरण नहीं किया जाना चाहिए या यदि किसी तरह की कूटनीतिक बाध्यता है तो उसमें बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को उन्होंने संसद में भी उठाया है। इसके बाद ही इसकी चर्चा होने लगी। पहले कहां कोई बात हो रही थी। 

छात्रों के मुद्दे पर तेजस्वी को घेरा

छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव पर भी संजय झा ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव किसी दूसरे विषय पर बोलें तो समझ में आता है, लेकिन छात्रों से उनका क्या लेना-देना है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साइकिल और पोशाक योजना जैसी पहल के माध्यम से बड़ा बदलाव किया और इतिहास रचा है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। हालांकि सरकारी नौकरियों की अपनी सीमाएं हैं। बिहार में जिस तरह निवेश बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

देशभर में प्रशिक्षण और काम के लिए जाने वाले बिहार के लोग भी भविष्य में अपने राज्य में ही काम करने के लिए लौटेंगे। इससे बिहार में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।