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    खाड़ी देशों में फिल्म ‘धुरंधर’ पर बैन को लेकर IMPPA का विरोध, अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग

    Updated: Fri, 09 Jan 2026 08:58 AM (IST)

    हिंदी फिल्म 'धुरंधर' पर खाड़ी देशों में प्रतिबंध के खिलाफ IMPPA ने विरोध जताया है। अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की अपील ...और पढ़ें

    अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग

    अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की मांग

    HighLights

    1. खाड़ी देशों में 'धुरंधर' फिल्म पर प्रतिबंध।

    2. IMPPA अध्यक्ष ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप मांगा।

    3. प्रतिबंध को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।

    जागरण संवाददाता, पटना। पांच जनवरी को रिलीज़ होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रही हिंदी फिल्म धुरंधर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। निर्माता-निर्देशक आदित्य धर की इस फिल्म ने अब तक दुनियाभर में करीब 1230 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है, लेकिन खाड़ी देशों से एक भी रुपये का योगदान नहीं हो सका है। इसकी वजह यूएई, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों में फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध है।

    इस प्रतिबंध को लेकर इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

    उन्होंने खाड़ी देशों में धुरंधर के प्रसारण की मांग करते हुए कहा है कि यह प्रतिबंध एकतरफा, अनुचित और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है।

    अभय सिन्हा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि धुरंधर को भारत में सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद विधिवत प्रमाणन प्राप्त हुआ है।

    इसके बाद ही फिल्म को देश और दुनिया के अन्य हिस्सों में रिलीज़ किया गया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और सफल फिल्मों में शामिल हो चुकी है, ऐसे में मित्र देशों द्वारा बिना किसी स्पष्ट कारण के प्रतिबंध लगाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

    IMPPA अध्यक्ष ने कहा कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय रहते हैं और वहां भारतीय फिल्मों की बड़ी दर्शक संख्या है। ऐसे में धुरंधर पर बैन से न केवल फिल्म निर्माताओं और निवेशकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वहां रहने वाले भारतीय दर्शक भी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कृति से वंचित हो रहे हैं।

    उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है।

    अभय सिन्हा ने कहा कि यूएई, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और ओमान भारत के मित्र राष्ट्र हैं और इन देशों के साथ भारत के व्यापारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा आपसी संवाद और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के ज़रिये सुलझाया जाना चाहिए।

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    उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि भारत सरकार संबंधित देशों के अधिकारियों से बात कर इस प्रतिबंध को हटवाने की दिशा में ठोस पहल करे।

    IMPPA का मानना है कि समय पर सरकार के हस्तक्षेप से न सिर्फ फिल्म उद्योग को राहत मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और रचनात्मक स्वतंत्रता की साख भी मजबूत होगी। संगठन ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री स्तर पर पहल होने से धुरंधर को जल्द ही खाड़ी देशों में भी प्रदर्शित करने का रास्ता साफ होगा और यह विवाद सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझेगा।