Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    देव स्नान पूर्णिमा पर जगन्नाथ का महाभिषेक, 108 कलशों से हुआ महास्नान; पटना इस्कान मंदिर में उमड़ी भीड़

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 08:27 PM (IST)

    पटना इस्कान मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलश गंगाजल से महास्नान और महाभिषेक किया गया। भगवान अब 15 दिनों के ...और पढ़ें

    16 जुलाई को रथ पर आरूढ़ होकर देंगे दर्शन

    16 जुलाई को रथ पर आरूढ़ होकर देंगे दर्शन

    HighLights

    1. पटना इस्कान मंदिर में देव स्नान पूर्णिमा पर उमड़ी भक्तों की भीड़।

    2. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा का 108 कलश गंगाजल से महास्नान।

    3. 15 दिनों के अनासर काल के बाद 16 जुलाई को रथयात्रा होगी।

    जागरण संवाददाता, पटना। ज्येष्ठ एवं देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर इस्कान मंदिर परिसर में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त 'हरे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी' के जयघोष के साथ भक्ति में लीन रहे। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का विधि-विधान से पूजन किया गया।

    108 कलशों के गंगाजल से कराया गया महास्नान

    देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं का 108 कलश गंगाजल से महास्नान कराया गया।

    इसके बाद पंचगव्य, दूध, शहद, घी और इत्र से महाभिषेक किया गया। भगवान को छप्पन भोग अर्पित करने के बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

    iscon tempal 1

    15 दिनों तक अनासर काल में रहेंगे भगवान

    मंदिर के चेयरमैन रमण मनोहर दास ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं, जिसे अनासर काल कहा जाता है।

    अगले 15 दिनों तक भगवान एकांत कक्ष में रहेंगे, जहां उन्हें विशेष जड़ी-बूटियों का काढ़ा और सात्विक भोग अर्पित किया जाएगा।

    iscon tempal 2

    16 जुलाई को रथ पर आरूढ़ होकर देंगे दर्शन

    उन्होंने बताया कि भगवान के स्वस्थ होने के बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर आरूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देंगे। इसी दिन भव्य रथयात्रा का आयोजन होगा।

    गजवेश में दर्शन देने की परंपरा

    धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्त गणपति भट्ट की इच्छा पूरी करने के लिए स्नान पूर्णिमा के दिन गणेश स्वरूप अर्थात गजवेश में दर्शन दिए थे।

    इसी परंपरा के तहत स्नान यात्रा के दिन भगवान को हाथी के मुख वाले गजवेश में सजाया जाता है।

    iscon tempal 3

    घाटों और मंदिरों में भी रही श्रद्धालुओं की भीड़

    देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर शहर के गांधी घाट, दीघा घाट सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया।

    घरों और मंदिरों में भगवान विष्णु एवं भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने खीर, दाल भरी पूरी और आम का भोग अर्पित कर दान-पुण्य किया। प्रमुख मठ-मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही।