जमुई की घटना ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल, छेड़खानी या पीछा हो तो क्या करें? महिलाओं के लिए जरूरी टिप्स
बिहार के जमुई में सामने आई छेड़छाड़ की घटना ने एक बार फिर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ...और पढ़ें

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट करना पड़ सकता है भारी। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
जमुई वीडियो पर पुलिस ने दो दर्जन से अधिक वीडियो हटाए।
नाबालिग की पहचान उजागर करने पर 120 अकाउंट संचालकों पर FIR।
पुलिस ने लोगों से वीडियो साझा न करने की अपील की।
डिजिटल डेस्क, पटना/जमुई। बिहार के जमुई में सामने आई हालिया घटना ने एक बार फिर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में नाबालिग छात्र-छात्रा स्कूटर पर बैठे दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ युवकों की भीड़ उन्हें घेरकर खड़ी है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह कोई पहला मामला नहीं है, जब छेड़खानी या महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आई हो। देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर से पढ़ाई, नौकरी या किसी जरूरी काम के लिए निकलने वाली महिलाएं और छात्राएं खुद को असहज या असुरक्षित स्थिति में पाए जाने पर क्या करें?
अगर आप भी रोजाना घर से बाहर निकलती हैं, तो कुछ जरूरी सावधानियां आपको ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित रहने और समय रहते मदद हासिल करने में मदद कर सकती हैं।
किसी अनजान जगह पर भीड़ से घिर जाने, पीछा किए जाने, छेड़खानी या किसी अन्य तरह के खतरे की स्थिति में घबराने के बजाय इन बातों का ध्यान रखें।
बिहार पुलिस ने आमजन से की अपील

(बिहार पुलिस ने आम लोगों से की अपील।)
बता दें कि जमुई की घटना के बाद बिहार पुलिस अब ऐसे अन्य लोगों, अकाउंट, पेज और वेबसाइट की पहचान कर रही है, जिन्होंने नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट या प्रसारित की है।
बिहार पुलिस ने लोगों से ऐसे वीडियो को साझा या रीपोस्ट नहीं करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि संवेदनशील सामग्री को आगे प्रसारित करने के बजाय उसकी सूचना संबंधित एजेंसी को देनी चाहिए।
ऐसे में सवाल है कि यदि किसी नाबालिग से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए तो क्या करना चाहिए? ऐसी स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
वीडियो वायरल हो तो सबसे पहले क्या करें?
किसी नाबालिग से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने पर उसे आगे शेयर, रीपोस्ट या किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं करना चाहिए। इससे वीडियो का प्रसार और बढ़ सकता है।
यदि किसी अकाउंट से ऐसी सामग्री पोस्ट की गई है तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के रिपोर्ट विकल्प से उसकी शिकायत की जा सकती है। जरूरत होने पर पुलिस या साइबर सेल को भी सूचना दें।
पीड़िता की पहचान उजागर न करें
नाबालिग का नाम, चेहरा, पता, स्कूल, परिवार, मोहल्ला या ऐसी कोई अन्य जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए, जिससे उसकी पहचान सामने आ सके।
POCSO की धारा 23 के तहत मीडिया में बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित करने पर रोक है। इसमें नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल, पड़ोस या पहचान सामने लाने वाली अन्य जानकारी शामिल है।
आपात स्थिति में 112 पर करें कॉल
यदि किसी महिला या बच्चे को तत्काल खतरा है या घटना उसी समय हो रही है तो 112 पर पुलिस सहायता ली जा सकती है। बिहार पुलिस की वेबसाइट पर 112 को आपातकालीन हेल्पलाइन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
महिलाओं के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

जरूरी हेल्पलाइन नंबर
- 112 - आपातकालीन पुलिस सहायता
- 181 - महिला हेल्पलाइन
- 1098 - चाइल्ड प्रोटेक्शन हेल्पलाइन
- 1930 - साइबर क्राइम हेल्पलाइन (स्रोत:विभागीय वेबसाइट)
यदि किसी नाबालिग का आपत्तिजनक वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है तो इसकी शिकायत साइबर अपराध तंत्र को की जा सकती है।
बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध है।
शिकायत करते समय वीडियो को दोबारा सार्वजनिक रूप से पोस्ट करने के बजाय संबंधित अकाउंट या पोस्ट की जानकारी पुलिस को देना उचित है।
घटना होने पर तुरंत क्या करें?
- यदि छेड़खानी या किसी अन्य तरह की बदसलूकी की घटना हो रही है तो सबसे पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की कोशिश करें। आसपास मौजूद भरोसेमंद लोगों से मदद लें और आवश्यकता होने पर पुलिस को सूचना दें।
- किसी तरह की बदसलूकी होने पर घटना को छिपाने के बजाय माता-पिता, अभिभावक या किसी भरोसेमंद वयस्क को तुरंत जानकारी दें। बच्चे को अकेले स्थिति संभालने के लिए मजबूर न करें।
- घटना की सूचना जल्द देने से पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित डिजिटल सामग्री की जांच करने में मदद मिल सकती है। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री की जानकारी भी पुलिस को दी जा सकती है।
- किसी संज्ञेय अपराध की स्थिति में क्षेत्राधिकार को लेकर तत्काल सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। पीड़िता या उसके अभिभावक पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। आवश्यकता होने पर पुलिस से जीरो एफआईआर की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली जा सकती है।
- अपने स्मार्टफोन में सुरक्षा ऐप्स (जैसे 112 India App) इंस्टॉल रखें, जिसमें पैनिक बटन (Panic Button) की सुविधा होती है।
- देर शाम या रात के समय अपरिचित या कम रोशनी वाले रास्तों (जैसे पहाड़ियों के पास, सुनसान हाईवे या खाली मैदानों) पर अकेले जाने से बचें।
- चलते समय हमेशा सतर्क और आत्मविश्वासी दिखें। आस-पास के माहौल पर नज़र रखें ।
- अपने बैग में सुरक्षा के लिहाज से पेपर स्प्रे (Pepper Spray) या चाबी का गुच्छा जैसी चीजें रखें, जिनका उपयोग आत्मरक्षा में किया जा सके।
सोशल मीडिया पर वीडियो डालने वालों पर कार्रवाई
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़िता का चेहरा दिखाने अथवा उसकी पहचान उजागर करने वाली सामग्री को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर कानूनी मामला है।
पुलिस ऐसे अकाउंट संचालकों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है। पुलिस के अनुसार, घटना से संबंधित वीडियो को शेयर या रीपोस्ट करने के बजाय लोगों को इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को देनी चाहिए।
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