JDU का बड़ा एक्शन, पूर्व प्रदेश महासचिव छोटू सिंह छह साल के लिए निष्कासित
जनता दल यूनाइटेड ने पूर्व प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को दल विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। पार् ...और पढ़ें

प्रदेश अध्यक्ष ने दी कार्रवाई की जानकारी
HighLights
JDU ने पूर्व महासचिव छोटू सिंह को निष्कासित किया।
दल विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल की कार्रवाई।
पार्टी ने अनुशासन और संगठनात्मक मर्यादा पर जोर दिया।
राज्य ब्यूरो, पटना। जनता दल यूनाइटेड ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश महासचिव अरविंद कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। जेडीयू ने उन पर दल विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है।
इस कार्रवाई के साथ ही उनकी प्राथमिक सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने इसे संगठनात्मक मर्यादा और अनुशासन से जुड़ा फैसला बताया है। इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।
प्रदेश अध्यक्ष ने दी कार्रवाई की जानकारी
जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष Umesh Kushwaha ने कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दल विरोधी आचरण को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
पार्टी की ओर से संबंधित नेता को निर्णय की जानकारी भी दे दी गई है। जेडीयू नेतृत्व का कहना है कि संगठन के हित सर्वोपरि हैं।
इसी आधार पर अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त रुख अपनाया जा रहा है। पार्टी ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रदेश कमेटी गठन के बाद बढ़ी थी नाराजगी
हाल के दिनों में जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी को लेकर चर्चा बनी हुई थी। कई नेताओं के बीच पद और जिम्मेदारियों को लेकर असंतोष की खबरें सामने आई थीं।
इसी बीच पार्टी की यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि पार्टी ने कार्रवाई का आधार केवल दल विरोधी गतिविधियों को बताया है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। आने वाले दिनों में इसका असर संगठनात्मक समीकरणों पर भी दिख सकता है।
अनुशासन और संगठन को प्राथमिकता देने का संदेश
जेडीयू इस फैसले के जरिए संगठन के भीतर स्पष्ट संदेश देना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासन किसी भी संगठन की सबसे बड़ी ताकत होता है।
इसी कारण संगठन विरोधी गतिविधियों को लेकर सख्त नीति अपनाई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषक भी इसे पार्टी की आंतरिक रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल इस कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।अब सभी की नजरें जेडीयू के अगले संगठनात्मक कदमों पर टिकी हैं।