नीतीश कुमार के नेतृत्व में JDU ने रचा इतिहास; 6 महीने से कम समय में सदस्यों का आंकड़ा 1 करोड़ पार
जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने सदस्यता अभियान के तहत छह महीने से भी कम समय में एक करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्य बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। ...और पढ़ें

सदस्यता अभियान की शुरुआत की थी नीतीश कुमार ने। सौ-एक्स
HighLights
जदयू ने 1 करोड़ से अधिक सदस्य बनाने का लक्ष्य पूरा किया।
यह उपलब्धि छह महीने से भी कम समय में हासिल हुई।
संजय झा ने घोषणा की, संगठन की मजबूती का प्रतीक।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JD) ने सदस्यता अभियान के तहत बड़ा मुकाम हासिल करने का दावा किया है।
पार्टी ने छह महीने से भी कम समय में एक करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्य बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इस उपलब्धि को लेकर जदयू नेतृत्व और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है।
जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी जानकारी साझा की।
उन्होंने पोस्ट कर बताया कि 6 दिसंबर 2025 को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए 'जदयू सदस्यता अभियान 2025-28' के तहत निर्धारित पहला बड़ा लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया गया है।

2 जून को ही पार कर गया 1 करोड़ का आंकड़ा
संजय झा ने बताया कि 2 जून 2026 तक पार्टी के प्राथमिक सदस्यों की संख्या बढ़कर एक करोड़ एक हजार नौ सौ पच्चीस पहुंच गई है। उन्होंने इसे जदयू संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का परिणाम बताया।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बूथ स्तर तक चलाए जा रहे सदस्यता अभियान को सफल बनाने में जुटे सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत सराहनीय है।
साथ ही उन्होंने बिहार के लोगों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने बड़ी संख्या में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर अभियान को व्यापक समर्थन दिया।
जदयू नेतृत्व का मानना है कि सदस्यता अभियान के माध्यम से संगठन को गांव, पंचायत और बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

पार्टी का संगठनात्मक आधार होगा मजबूत
संजय झा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पार्टी बिहार के विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दिनों में सदस्यता अभियान और व्यापक रूप से जारी रहेगा तथा पार्टी का संगठनात्मक आधार और मजबूत होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सदस्यता अभियान के आंकड़े केवल संगठन की पहुंच का संकेत नहीं होते, बल्कि चुनावी तैयारियों और जमीनी नेटवर्क की मजबूती का भी महत्वपूर्ण पैमाना माने जाते हैं।