JDU में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, नीतीश के सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता पर संकट
दिलेश्वर कामैत ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस देकर जेडीयू सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की है। ...और पढ़ें

गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग
HighLights
दिलेश्वर कामैत ने गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की।
पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई।
नीतीश नेतृत्व का सख्ती दिखाने का संकेत, बिहार राजनीति में हलचल।
डिजिटल डेस्क, पटना। दिलीश्वर कामैत ने बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर को नोटिस सौंपा है। इस नोटिस में गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की गई है। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में की गई है।
जेडीयू के अंदर इस कदम को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
मामला अब सीधे संसद के स्तर पर पहुंच गया है। इससे बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
पार्टी लाइन से अलग बयान पड़े भारी
बताया जा रहा है कि गिरधारी यादव पर लंबे समय से पार्टी लाइन से अलग चलने के आरोप लगते रहे हैं।
इससे पहले भी उनके बयानों को लेकर पार्टी ने नाराजगी जताई थी। चुनावी मुद्दों और संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी से विवाद बढ़ा था।
पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना था। ऐसे मामलों में पहले भी उन्हें नोटिस दिया जा चुका है।
अब मामला सीधे अयोग्यता की मांग तक पहुंच गया है।
नीतीश नेतृत्व को संदेश?
इस पूरे घटनाक्रम को नीतीश कुमार के नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी के अंदर सख्ती दिखाने की कोशिश के रूप में भी इसे समझा जा रहा है।
जेडीयू नेतृत्व नहीं चाहता कि कोई नेता सार्वजनिक रूप से अलग लाइन ले। यह कदम अन्य नेताओं के लिए भी एक संकेत माना जा रहा है।
विशेषकर चुनावी माहौल में पार्टी अनुशासन पर जोर दे रही है। इससे संगठन के भीतर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश दिखती है।
पहले भी रहे हैं विवादों में
गिरधारी यादव पहले भी विवादों में रह चुके हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर बयान देकर पार्टी को असहज किया था।
उनके इस रुख को पार्टी के लिए 'सुविधाजनक' बताया गया था। इसी वजह से उन्हें कारण बताओ नोटिस भी दिया गया था।
लगातार विवादों के कारण अब स्थिति गंभीर होती दिख रही है। पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
बिहार की राजनीति में बढ़ेगा असर
इस पूरे घटनाक्रम का असर बिहार की राजनीति पर भी पड़ सकता है। जेडीयू के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है।
विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो सकता है। संसदीय स्तर पर मामला पहुंचने से इसकी गंभीरता बढ़ गई है।
आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक बयानबाजी संभव है। अब नजर स्पीकर के फैसले और पार्टी की अगली रणनीति पर टिकी है।
