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22 सितंबर को कर्मा-धर्मा एकादशी: करवट बदलेंगे श्रीहरि, बहनें मांगेंगी भाई की सलामती का वरदान

Published: Sat, 19 Sep 2026 07:00 AM (IST)

भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए कर्मा-धर्मा एकादशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन उत्तराषाढ़ा व श्रवण ...और पढ़ें

22 सितंबर को कर्मा-धर्मा एकादशी: करवट बदलेंगे श्रीहरि, बहनें मांगेंगी भाई की सलामती का वरदान (AI Generated Image)

22 सितंबर को कर्मा-धर्मा एकादशी: करवट बदलेंगे श्रीहरि, बहनें मांगेंगी भाई की सलामती का वरदान (AI Generated Image)

HighLights

  1. भाई की सुख-समृद्धि और दीर्घायु के लिए कर्मा-धर्मा एकादशी 22 सितंबर को।

  2. उत्तराषाढ़ा, श्रवण नक्षत्र और सुकर्म योग का शुभ संयोग इस दिन बन रहा है।

  3. भगवान नारायण, गौरी-गणेश, भोलेनाथ की विधिवत पूजा की जाएगी।

जागरण संवाददाता, पटना। भाई की सुख-समृद्धि, दीर्घायु और रक्षा की कामना का पर्व कर्मा-धर्मा एकादशी 22 सितंबर मंगलवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर उत्तराषाढ़ा व श्रवण नक्षत्र के युग्म संयोग के साथ सुकर्म योग का शुभ संयोग बन रहा है।

गृहस्थों के साथ वैष्णवजन भी व्रत करेंगे। 21 सितंबर को दशमी तिथि में नहाय-खाय के साथ व्रत की तैयारी होगी।

ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि इस दिन मकर लग्न में चंद्रमा विराजमान रहेगा। झारखंड, छतीसगढ़, ओडिशा आदि इलाके के महिलाएं पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।

क्यों मनाया जाता है यह पर्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरिशयन एकादशी में जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हें तो कर्मा-धर्मा एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी के दिन उन्हें योग निद्रा से जगाया जाता है।

कर्मा-धर्मा एकादशी के दिन कुश तथा राढ़ी घास से भगवान नारायण की प्रतिमा बनाकर रोली, चंदन, पंचामृत, फूल, दूर्वा, धुप-दीप व फल-नैवेद्य आदि से पूजा की जाती है।

इसके अलावा, गौरी-गणेश व भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा होगी। भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेंगे। एकादशी की रात महिलाएं कीर्तन-भजन, पारंपरिक लोकगीत गाकर रात्रि जागरण तथा उत्सव मनाएंगी। अगले दिन द्वादशी तिथि में पूजित सामग्री को विसर्जित कर व्रत का पारण करेंगी।

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