Kharmas Kab se hai 2026: इस तारीख से शुरू होगा खरमास, 1 महीने के लिए थम जाएगी शहनाई की गूंज
खरमास 14 मार्च 2026 से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा। इस दौरान सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा के अनुसार, स ...और पढ़ें

14 मार्च से आरंभ होगा खरमास, मांगलिक कार्य पर विराम

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जागरण संवाददाता, पटना। हिंदू धर्मावलंबियों के खास माह खरमास 14 मार्च शनिवार (Kharmas 14th March 2026) से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही शुभ कार्यों, मांगलिक कार्यों पर एक मास के लिए विराम लग जाएगा। फिर 14 अप्रैल मंगलवार को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास समाप्त हो जाएगा।
14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के बाद खरमास का समापन होगा। खरमास में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा,पाठ करने से अत्यंत प्रसन्न होते हैं और जातक यहां सब प्रकार के सुख भोगकर मृत्यु के बाद भगवान के दिव्य गोलोक में निवास करता है।
खरमास में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, यज्ञादि, दान आदि करने से अतुल्य पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि चैत्र कृष्ण एकादशी 14 मार्च की देर रात 3.07 बजे सूर्य कुंभ राशि से निकल कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास शुरू हो जाएगा।
सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास (अधिक मास) आरंभ हो जाएगा। फिर वैशाख कृष्ण द्वादशी 14 अप्रैल मंगलवार के दोपहर 11:25 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके बाद खरमास खत्म होगा। सूर्य ही संक्रांति और लग्न के राजा माने जाते हैं। इनकी राशि का परिवर्तन ही खरमास का द्याेतक है।
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सूर्य संक्रांति और लग्न के राजा माने जाते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शादी-विवाह में शुभता के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का उदित व उत्तम योग में होना आवश्यक है। इनमें से किसी एक के भी अस्त या मलिन होने पर शुभ मुहूर्त नहीं बनता है।
पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि इस वर्ष अधिक मास का संयोग बना रहेगा। इस बार ज्येष्ठ दो माह का होगा। दो मई से 31 मई तथा एक जून से 29 जून तक ज्येष्ठ मास रहेगा। 15 मई से 17 जून तक मलमास रहेगा और इस दौरान शादी-ब्याह आदि शुभ कार्य नहीं होगा।
इसके बाद 25 जुलाई से 20 नवंबर तक चातुर्मास होगा। इस दौरान भगवान विष्णु चार मास के लिए योग निद्रा में जाएंगे। चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्य नहीं होगा।
गुरु-शुक्र की शुभता से तय होता है लग्न
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह संस्कार के शुभ योग के लिए गुरु, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक मीन राशि की संक्रांति होने के कारण खरमास रहेगा और इस दौरान शुभ मांगलिक कार्य नहीं होंगे।
खरमास के बाद बनारसी पंचांग से विवाह के लिए 38 दिन तथा मिथिला पंचांग से 21 दिन शुभ मुहूर्त है। चातुर्मास लगने से चार मास के लिए शहनाई की गूंज पर रोक लग जाएगा।
शुभ नक्षत्र व शुभ लग्न का होना जरूरी
शादी-ब्याह के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्ही एक का होना जरूरी है। नक्षत्रों में अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति,श्रवणा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र व उत्तरा आषाढ़ में किन्ही एक का रहना जरूरी है।
अति उत्तम मुहूर्त के लिए रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में से किन्ही एक की उपस्थिति रहने पर शुभ मुहूर्त बनता है। विवाह माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है।
शादी के शुभ मुहूर्त:
बनारसी पंचांग के मुताबिक
- अप्रैल: 15, 16, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29, 30
- मई: 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14
- जून: 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 28, 29
- जुलाई: 1,2, 6, 7, 8, 11, 1
मिथिला पंचांग के अनुसार
- अप्रैल: 17, 20, 26, 30
- मई: 1, 6, 8, 10, 13
- जून: 19, 24, 25, 26, 28, 29
- जुलाई: 1, 2, 3, 6, 9, 12
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