Vivah Muhurat 2026: आज खत्म होगा खरमास, सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ शुरू होंगे शादी-विवाह; नोट कर लें शुभ मुहूर्त
आज सूर्य के मीन से मेष राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त हो रहा है, जिससे मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। देशभर में शादी-विवाह का सीजन फिर से शुरू ह ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पटना। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन बेहद खास है। Sun Transit के तहत सूर्य मीन राशि से मेष में प्रवेश करेंगे। इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।
अब इसके खत्म होते ही शुभ कार्यों की शुरुआत होगी। लोग लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रहे थे।
फिर गूंजेगी शहनाई, शुरू होगा शादी-विवाह का सीजन
खरमास खत्म होते ही शादी-विवाह का दौर शुरू हो जाएगा। पूरे बिहार समेत देशभर में शादियों की रौनक लौटेगी।
बाजारों में भी खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है। बैंक्वेट हॉल और मैरिज गार्डन की बुकिंग तेज होगी।
ज्वेलरी और कपड़ों की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ेगी। यह समय कारोबारियों के लिए भी खास माना जाता है।
लेकिन बीच में फिर लगेगा ब्रेक, मलमास की एंट्री
हालांकि शादी-विवाह का यह दौर ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। 17 मई से 15 जून तक मलमास लग जाएगा।
इस दौरान फिर से मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी। लगभग एक महीने तक शादियां नहीं होंगी।
इसलिए लोगों को सीमित समय में ही आयोजन करना होगा। यह ज्योतिषीय गणना के अनुसार तय होता है।
कुल 38 शुभ मुहूर्त, मिथिला में 21 लग्न तय
बनारसी पंचांग के अनुसार इस बार 38 शुभ मुहूर्त हैं। इन मुहूर्तों में शादी-विवाह किए जा सकते हैं।
वहीं मिथिला पंचांग में 21 लग्न मुहूर्त बताए गए हैं। हर क्षेत्र में पंचांग के अनुसार मुहूर्त तय होते हैं।
लोग अपने-अपने परंपरा के अनुसार तिथि चुनते हैं। शुभ मुहूर्त का पालन विवाह में अहम माना जाता है।
चातुर्मास में फिर लगेगा लंबा विराम
मलमास के बाद चातुर्मास शुरू हो जाएगा। चातुर्मास करीब चार महीने तक चलता है। इस दौरान भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय व्रत-उपासना का होता है। शादी-विवाह जैसे आयोजन पूरी तरह बंद रहते हैं।
इसलिए वर्तमान समय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विवाह में ग्रह-नक्षत्रों की भूमिका अहम
पंडितों के अनुसार विवाह में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व है। ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति को जरूरी माना जाता है।
विशेष रूप से गुरु, शुक्र और सूर्य का शुभ होना आवश्यक है। Astrology में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
वैवाहिक संबंध को सबसे पवित्र बंधन माना गया है। इसलिए शुभ समय में ही विवाह करने की परंपरा है।
विवाह का शुभ मुहूर्त:
बनारसी पंचांग के अनुसार
- अप्रैल: 15, 16, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29, 30
- मई: 1, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 12, 13, 14
- जून: 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 27, 28, 29
- जुलाई: 1, 2, 6, 7, 8, 12
मिथिला पंचांग
- अप्रैल: 17, 20, 26, 30
- मई: 1, 6, 8, 10, 13
- जून: 19, 24, 25, 26, 28, 29
- जुलाई: 1, 2, 3, 6, 9, 12