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    लालू परिवार के काम नहीं आई 8 साल पहले वाली रणनीति, अब कौटिल्य नगर में शिफ्ट होने की तैयारी

    Updated: Sun, 07 Jun 2026 10:46 PM (IST)

    लालू परिवार को पटना में अपने आवास और सुरक्षा को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें

    राबड़ी देवी के आवास पर सुरक्षा में तैनात हुए नेता व कार्यकर्ता। (जागरण)

    राबड़ी देवी के आवास पर सुरक्षा में तैनात हुए नेता व कार्यकर्ता। (जागरण)

    HighLights

    1. राबड़ी देवी 10, सर्कुलर रोड बंगला खाली करने को तैयार नहीं।

    2. लालू परिवार की सुरक्षा घटी, राजद कार्यकर्ता कर रहे पहरेदारी।

    3. लालू प्रसाद ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया।

    राज्य ब्यूरो, पटना। कहते हैं कि इतिहास अपने को दोहराता है, लेकिन इस बार राजद के लिए संभवत: उसकी पुनरावृत्ति नहीं हो।

    आठ वर्ष पहले की तरह इस बार भी आशा थी, लेकिन सत्ता के बदले समीकरण में कोई पैंतरा काम नहीं आ रहा। सरकार न तो राबड़ी देवी को पुराने बंगले (10, सर्कुलर रोड) में बने रहने की अनुमति दे रही और न ही सुरक्षा व्यवस्था में हुई कटौती पर पुनर्विचार का आश्वासन।

    रुटीन चेकअप के बाद सिंगापुर से पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद पटना लौटने वाले हैं, लिहाजा राबड़ी आवास की पहरेदारी में राजद-जन कुछ और तत्पर हो गए हैं। कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाकर दो पालियों में ड्यूटी लगा दी गई है।

    राबड़ी देवी ने मकान का लिया जायजा

    उनमें से कुछ अपनी लाठियों मेंं तेल भी पिलाने लगे हैं। दोपहर में पार्टी के नेता भी घंटे भर के लिए जुट जा रहे। इस बीच लालू परिवार शिफ्टिंग के बारे में सोचने लगा है। रविवार अपराह्न राबड़ी देवी ने कौटिल्य नगर स्थित मकान का जायजा भी लिया, जहां अभी निर्माण-कार्य चल रहा है।

    विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से राबड़ी को 39, हार्डिंग रोड वाला बंगला पिछले वर्ष नवंबर में ही आवंटित हुआ था। शिफ्टिंग के लिए तीसरी बार नोटिस मिलने पर राबड़ी आगबबूला हो गईं। सार्वजनिक तौर पर उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो बल प्रयोग कर खाली करा ले, अन्यथा वे बंगले से हटने से रहीं।

    संदेश सत्ता के शीर्ष से आया 

    बंगला किसी की बपौती नहीं। प्रतिकार में पार्टी के नेताओं ने कहा कि राजद के सभी जन-प्रतिनिधि आवास वापस कर देंगे। सत्ता पक्ष ने कहा कि तथास्तु। इस बीच राज्य सुरक्षा समिति ने लालू-राबड़ी सहित तेजप्रताप की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती कर दी।

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    इनके अतिरिक्त तेजस्वी यादव, मीसा भारती और रचेल (परिवर्तित नाम राजश्री) को सरकार सुरक्षा दे रही है। यानी कि लालू परिवार के छह सदस्यों को सरकारी सुरक्षा है।

    आठ वर्ष पहले यानी वर्ष 2018 में चार स्वजनों (लालू, राबड़ी, तेजस्वी, तेजप्रताप) को सुरक्षा मिल रही थी। तब लालू की सुरक्षा व्यवस्था वापस ले ली गई थी, लेकिन राबड़ी की आपत्ति के बाद वह दोबारा बहाल हो गई थी।

    राबड़ी के अनुरोध पर पसीज गए थे नीतीश 

    अप्रैल, 2018 में लालू की सुरक्षा में तैनात बीएमपी-2 के 32 जवानों को वापस बुला लिया गया था। इसके लिए गृह विभाग का निर्देश था। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हुआ करते थे, जो उस निर्देश के समय पटना से बाहर थे।

    तब राबड़ी, तेजस्वी और तेजप्रताप के साथ राजद के लगभग 20 विधायकों ने भी अपनी-अपनी सुरक्षा लौटा दी थी। मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर राबड़ी ने आपत्ति जताई थी, इस चेतावनी के साथ कि किसी भी अप्रिय घटना के लिए सरकार जिम्मेदार होगी। उसके अगले दिन नीतीश पटना लौट आए थे।

    उन्होंने राबड़ी आवास की सुरक्षा फिर से बहाल करने का निर्देश दिया और गृह विभाग से पूछा था कि सुरक्षा में परिवर्तन का निर्णय कब, क्यों और किस स्तर पर लिया गया?

    नीतीश के आदेश से तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी खिन्न थे, लेकिन परिस्थितिवश वे मुखर नहीं हुए। उल्लेखनीय है कि तब लालू जेल में थे। उसी आधार पर सुरक्षा बल वापस बुलाए गए थे। हालांकि, राबड़ी आदि की सुरक्षा में कोई कटौती नहीं हुई थी।

    दो शिफ्ट में राजद की पहरेदारी 

    राजद की ओर से राबड़ी आवास की पहरेदारी के निर्धारण का दायित्व पूर्व विधायक दीनानाथ यादव को मिला है। पटना जिला के कार्यकर्ताओं की दो टोलियां 12-12 घंटे (पूर्वाह्न नौ बजे से रात के नौ बजे और रात के नौ बजे से पूर्वाह्न नौ बजे तक) की ड्यूटी बजा रही।

    दीनानाथ का दावा है कि परिवार की आजीवन पहरेदारी के लिए कार्यकर्ता तैयार हैं। राजद के कार्यकर्ता हट्ठे-कट्ठे और हर परिस्थिति से जूझने वाले हैं।

    लालू ने बढ़ाया हौसला 

    रविवार को लालू ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से राजद के वरीय नेताओं और राबड़ी आवास के पहरेदारों से बातचीत की। वर्तमान परिस्थिति को विकट बताते हुए उन्होंने हौसला बनाए रखने और सधी रणनीति के साथ संघर्ष को आगे बढ़ाने की सीख दी। दिल्ली में सोमवार को आईएनडीआईए की बैठक है। इसी कारण लालू पटना नहीं आए।

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