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महानंदा एक्सप्रेस हादसा: लाल सिग्नल वाली लाइन पर हरा सिग्नल समझकर चलाई ट्रेन, पीछे करते समय हुआ डिरेलमेंट

Published: Sun, 06 Sep 2026 03:45 PM (IST)

आरा स्टेशन पर महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने की प्रारंभिक जांच में लोको पायलट की चूक सामने आई है।

आरा रेलवे स्टेशन के अप लाइन पर खड़ी महानंदा एक्सप्रेस ट्रेन। (जागरण)

आरा रेलवे स्टेशन के अप लाइन पर खड़ी महानंदा एक्सप्रेस ट्रेन। (जागरण)

HighLights

  1. लोको पायलट की गलती से आरा में महानंदा एक्सप्रेस पटरी से उतरी।

  2. दूसरी लाइन के हरे सिग्नल को अपनी ट्रेन का समझा गया।

  3. रेलवे ने घटना की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है।

विद्या सागर, पटना। आरा स्टेशन पर महानंदा एक्सप्रेस के डिरेल होने की घटना में प्रारंभिक जांच में लोको पायलट की चूक सामने आई है।

जिस लाइन पर ट्रेन खड़ी थी, उसका सिग्नल लाल था, जबकि सासाराम लाइन का सिग्नल हरा हो गया। लोको पायलट ने हरे सिग्नल को अपनी ट्रेन के लिए समझ लिया और ट्रेन आगे बढ़ा दी।

गलती का एहसास होने पर ट्रेन को पीछे करने की कोशिश की गई। इसी दौरान दो कोच की एक - एक ट्राली पटरी से उतर गई। घटना में किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं है।

रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी सिग्नल की स्थिति से लेकर लोको पायलट की ड्यूटी, फिटनेस, प्रशिक्षण और पुराने सेवा रिकॉर्ड तक की जांच करेगी।

सोमवार से कमेटी की बैठक शुरू होगी। वहीं, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और अन्य संबंधित रेलकर्मियों के बयान आरा में दर्ज किए जा रहे हैं।

ब्रेथ एनालाइजर से होगी जांच, आंखों का भी टेस्ट

जांच के दौरान लोको पायलट का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया जाएगा। रेलवे यह भी जांचेगा कि ड्यूटी के समय वह पूरी तरह फिट था या नहीं। आंखों की जांच भी कराई जाएगी।

इसके अलावा घटना से पहले की उसकी ड्यूटी और विश्राम का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। लगातार ड्यूटी या पर्याप्त आराम नहीं मिलने की स्थिति को भी जांच में शामिल किया जाएगा।

चार सदस्यीय कमेटी खंगालेगी सिग्नल से प्वाइंट तक की स्थिति

जांच कमेटी में पूर्व मध्य रेल के प्रधान मुख्य संरक्षा अधिकारी, मुख्य इलेक्ट्रिक लोको इंजीनियर, दानापुर मंडल के एडीआरएम (ऑपरेशन) और मुख्य सिग्नल अभियंता शामिल हैं।

कमेटी सिग्नलिंग सिस्टम, प्वाइंट की स्थिति और ट्रेन संचालन की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। यह भी देखा जाएगा कि सासाराम लाइन का सिग्नल हरा होने के बावजूद लोको पायलट ने उसे अपनी ट्रेन का सिग्नल क्यों समझा।

पुराने रिकॉर्ड और ट्रेनिंग की भी होगी पड़ताल

लोको पायलट के पुराने सेवा रिकॉर्ड की जांच में यह देखा जाएगा कि उसके खिलाफ पहले कभी चार्जशीट या अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई थी या नहीं। उसके प्रशिक्षण और रिफ्रेशर ट्रेनिंग का रिकॉर्ड भी खंगाला जाएगा। कोई निर्धारित प्रशिक्षण छूटा है तो उसकी भी जानकारी रिपोर्ट में शामिल की जाएगी।

सुबह 4:12 बजे मिली सूचना, 7:23 बजे रवाना हुई ट्रेन

पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ सरस्वती चन्द्र ने बताया कि घटना की सूचना सुबह 4:12 बजे मिली थी। राहत और बहाली का काम पूरा करने के बाद ट्रेन को 7:23 बजे ठीक कर गंतव्य की ओर रवाना कर दिया गया।

घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है और न ही किसी को चोट आई है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर और जिम्मेदारी स्पष्ट होगी।

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