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मगध महिला कॉलेज में छात्रा परिषद चुनाव का बिगुल बजा, 16 सितंबर को होगा मतदान

Published: Tue, 08 Sep 2026 01:28 PM (IST)

मगध महिला कॉलेज में सत्र 2026-27 के लिए छात्रा परिषद चुनाव प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई है, जिसमें 16 ...और पढ़ें

मगध महिला कॉलेज। फाइल फोटो

मगध महिला कॉलेज। फाइल फोटो

HighLights

  1. मगध महिला कॉलेज में छात्रा परिषद चुनाव प्रक्रिया शुरू।

  2. 16 सितंबर को 13 पदों के लिए मतदान होगा।

  3. आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने छात्र अधिकारों पर की चर्चा।

जागरण संवाददाता, पटना। मगध महिला कालेज में सत्र 2026-27 के लिए छात्रा परिषद चुनाव की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई। 16 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए इच्छुक छात्राएं 8 से 10 सितंबर तक नामांकन फार्म भर सकेंगी। 12 सितंबर को प्रत्याशियों का साक्षात्कार होगा, जबकि 13 और 14 सितंबर को चुनाव प्रचार का मौका मिलेगा।

मतदान के बाद 16 सितंबर को ही परिणाम घोषित किए जाएंगे। नवनिर्वाचित परिषद का शपथ ग्रहण 19 सितंबर को होगा। चुनाव के दौरान छात्राएं कालेज के निर्धारित नियमों और आचार-संहिता का पालन करते हुए अपने विचार और घोषणापत्र साथी छात्राओं के सामने रखेंगी।

प्रचार के दौरान प्रत्याशी अपने एजेंडे, छात्राओं से जुड़े मुद्दों और कालेज के शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को बेहतर बनाने की योजनाओं से अवगत करा सकेंगी। छात्रा परिषद में इस बार 13 पदों के लिए चुनाव होगा।

इनमें महासचिव, सहायक खेल सचिव, सहायक खेल सचिव, कामन रूम सचिव, सहायक कामन रूम सचिव, विज्ञान एवं आइटी सचिव, सहायक विज्ञान एवं आइटी सचिव, स्वच्छता एवं पर्यावरण सचिव, महासचिव, कोषाध्यक्ष, सांस्कृतिक सचिव, सहायक सांस्कृतिक सचिव, तथा सहायक स्वच्छता एवं पर्यावरण सचिव के पद शामिल हैं।

12 सितंबर को होने वाले साक्षात्कार में प्रत्याशियों की पात्रता और नेतृत्व क्षमता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रचार के दौरान छात्राएं अपने घोषणापत्र और प्राथमिकताओं को मतदाताओं तक पहुंचाएंगी।

विश्वविद्यालय केवल डिग्री हासिल करने का केंद्र नहीं : नेहा बोरा

आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा ) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने सोमवार को पटना विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में भाकपा-माले की विधान पार्षद शशि यादव भी मौजूद रही।

नेहा बोरा ने विद्यार्थियों को डर और चुप्पी की राजनीति को ठुकराकर अधिकार, लोकतंत्र और न्याय के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री हासिल करने का केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना और सामाजिक बदलाव की प्रयोगशाला हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 को बचाने के लिए संघर्ष को तेज करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक और स्वायत्त चरित्र को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ छात्रों को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने पटना कालेज में संवाद के दौरान जेंडर न्याय का मुद्दा भी उठाया।

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