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खरमास खत्म, शुभ कार्यों की शुरुआत; मकर संक्रांति के बाद का पुण्यकाल जानिए

By parbhat ranjanEdited By: Radha Krishna
Published: Wed, 14 Jan 2026 10:45 AM (IST)

मकर संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो गया है, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत हुई है। सूर्य के मकर राशि ...और पढ़ें

शुभ कार्यों की शुरुआत

शुभ कार्यों की शुरुआत

HighLights

  1. मकर संक्रांति से खरमास समाप्त, शुभ कार्यों की शुरुआत।

  2. सूर्य के उत्तरायण होने से देवताओं का दिन आरंभ।

  3. स्नान-दान का विशेष पुण्यकाल, मांगलिक आयोजनों में तेजी।

जागरण संवाददाता, पटना। मकर संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो गया है और इसके बाद शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही उत्तरायण काल आरंभ होता है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है। इसी कारण मकर संक्रांति के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक संस्कारों के लिए रास्ता साफ हो जाता है।

सूर्य उत्तरायण और शुभ काल का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य के उत्तरायण होने पर देवताओं का दिन आरंभ होता है। इस काल में किए गए शुभ कार्य और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति को इसी परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है, इसलिए यह पर्व धार्मिक के साथ-साथ ज्योतिषीय रूप से भी खास होता है।

स्नान-दान का विशेष पुण्यकाल

मकर संक्रांति के बाद स्नान-दान का पुण्यकाल शुरू हो जाता है। गंगा, यमुना, सरस्वती सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति मानी गई है। जो लोग नदी स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इस दौरान तिल, गुड़, चावल, खिचड़ी, अन्न और वस्त्र का दान अत्यंत फलदायी माना जाता है।

कब और क्यों लगता है खरमास

खरमास उस अवधि को कहा जाता है जब सूर्य धनु राशि में होते हैं। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह, गृह प्रवेश जैसे संस्कार नहीं किए जाते। मकर संक्रांति के साथ ही यह प्रतिबंध समाप्त हो जाता है और फिर से शुभ तिथियों की गणना शुरू हो जाती है।

दान-पुण्य का धार्मिक और सामाजिक पक्ष

मकर संक्रांति के बाद किया गया दान अक्षय फल देने वाला माना गया है। खासकर तिल का दान पाप नाशक बताया गया है। ठंड के मौसम को देखते हुए कंबल और गर्म वस्त्र का दान भी पुण्यदायी माना जाता है। इससे न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जरूरतमंदों की मदद भी होती है।

मांगलिक आयोजनों की बढ़ेगी रफ्तार

खरमास समाप्त होने के बाद अब शादियों और अन्य मांगलिक आयोजनों की तैयारियां तेज हो जाएंगी। पंडितों के अनुसार मकर संक्रांति के बाद से पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त तय किए जाएंगे। कुल मिलाकर मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नए शुभ काल की शुरुआत का संकेत है, जो जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।

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