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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 27, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Politics: 'थैली के गुलाम बने विधायक..', संगीता देवी के पाला बदलने के बाद RJD का बयान; क्या जाएगी सदस्यता?

    Updated: Tue, 27 Feb 2024 08:46 PM (GMT+05:30)

    राष्ट्रीय जनता दल को पिछले 15 दिनों में दूसरा बड़ा झटका लगा है। फ्लोर टेस्ट में तीन विधायकों ने नीतीश का साथ दिया था। वहीं अब मोहनिया विधायक संगीता दे ...और पढ़ें

    संगीता देवी के पाला बदलने के बाद RJD का बयान; क्या जाएगी सदस्यता?
    संगीता देवी के पाला बदलने के बाद RJD का बयान; क्या जाएगी सदस्यता?

    HighLights

    1. थैली के गुलाम बने विधायकों की सदस्यता जाएगी : मनोज झा
    2. मनोज झा बोले- विधानसभा अध्यक्ष से भी करेंगे गुहार, दल बदल कानून के तहत हो कार्रवाई
    3. तेजस्वी यादव की यात्रा से डर गई है भाजपा, कई राज्यों में यात्रा चर्चा में

    राज्य ब्यूरो, पटना। राजद में पहले तीन विधायकों के दल छोड़ने के बाद अब मोहनिया विधायक संगीता देवी के दल छोड़ने को राजद ने गंभीरता से लिया है। पार्टी ने कहा है कि थैली के गुलाम बने विधायकों की चिंता नहीं। इनकी तो सदस्यता जाना तय है। वहीं, पार्टी ने इस मामले को विधानसभा अध्यक्ष के ध्यानार्थ उठाने की बात भी कही है।

    राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि तेजस्वी यादव 20 फरवरी से न्याय यात्रा पर है। यात्रा की लहर का जो प्रभाव है उसका अंदाजा भाजपा के धन्ना सेठों को है। उस थैली का इस्तेमाल कर वे कुछ भी कर सकते हैं। राजद ने अपने जन्म काल से हजारों विधायक पैदा किए हैं। जिनके पास जन समर्थन होता है वे धन्ना सेठों की थैली के गुलाम बन गए विधायकों का चिंता नहीं करता।

    उन्होंने दोहराया कि तेजस्वी को जितना समर्थन मिल रहा है उससे दिल्ली से लेकर गुजरात और बिहार के जदयू खासकर भाजपा नेताओं की नींद उड़ी हुई है, इसलिए थैली की मदद लेकर वे यह सब काम कर रहे हैं।

    'लोकतंत्र में डकैती...'

    मनोज झा ने कहा विधानसभा अध्यक्ष सबकुछ देख रहे हैं। हम जाएंगे उनके पास गुहार लगाएंगे। यह दल बदल विरोधी कानून है जो कभी नहीं होता है कि चार विधायकों को आप जगह आवंटित कर देंगे। लोकतंत्र में डकैती करने की अगर यह विधा आपने विकसित की है तो यह बिहार है।

    'इन चारों की सदस्यता जाएगी'

    उन्होंने कहा कि सदस्यता तो इन चारों की जाएगी, क्योंकि दल विरोधी कानून को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के ख्याल इतने सख्त हैं कि कोई विधानसभा अध्यक्ष इसका उल्लंघन नहीं कर सकता। यदि कोई स्पीकर ऐसा करने की कोशिश करेगा तो इतिहास के पन्नों में उस स्पीकर का कोई नाम लेना भी पसंद नहीं करेगा।

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