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    मसौढ़ी में गहराता जल संकट: पारंपरिक स्रोत सूखे, अब 'डिब्बाबंद' पानी के भरोसे हजारों प्यास

    Updated: Tue, 28 Apr 2026 06:16 AM (IST)

    मसौढ़ी में पारंपरिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण और जलस्तर में गिरावट के कारण गंभीर जल संकट गहरा गया है। लोग अब पेयजल के लिए डिब्बाबंद पानी पर निर्भर हैं, जि ...और पढ़ें

    मसौढ़ी में गहराता जल संकट

    मसौढ़ी में गहराता जल संकट

    HighLights

    1. पारंपरिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण से जलस्तर गिरा।

    2. मसौढ़ी में पेयजल के लिए डिब्बाबंद पानी पर निर्भरता।

    3. स्थानीय पानी का टीडीएस स्तर काफी अधिक।

    संवाद सहयोगी,  मसौढ़ी। आहर, पोखर, पइन जैसे पारंपरिक जलस्रोतों पर अवैध अतिक्रमण की वजह से जलस्तर में गिरावट आई है। कुछ मजबूरी और कुछ आधुनिकता के कारण कुआं और चापाकल से पानी की निकासी लगभग कम सी हो गई है।समाज में बढ़ती सुविधाभोगी पीढ़ी अब चापाकल की जगह समरसेबुल को और उससे भी बढ़कर आरओ व डिब्बाबंद पानी पर ज्यादा भरोसा जताने लगी है।

    घरेलू पेयजल के अलावे दुकानों में और शादी- ब्याह व श्राद्ध कर्म में भी अब डिब्बाबंद पानी का प्रचलन जोर पकड़ लिया है। मसौढ़ी में डिब्बाबंद जलापूर्ति की भी तीन एजेंसिया हैं। लेकिन उसकी गुणवता कैसी है कहना मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि कभी भी किसी भी स्तर से इसकी जांच नहीं की गई। 

    मसौढ़ी ब्लॉक के पास का पानी 350 से 400 टीडीएस

    जानकारों का मानना है कि पीने के लिए सबसे अच्छा पानी का टीडीएस स्तर 75 से 150 मिलीग्राम प्रति लीटर (पीपीएम) होता है।यह स्वास्थ्य और स्वाद दोनों के लिहाज बेहतर होता है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के अनुसार 500 एमजी प्रति लीटर से कम टीडीएस वाला पानी सुरक्षित है।

    लेकिन इससे अधिक होने पर उपचार की सलाह दी जाती है ।जैसे आरओ का प्रयोग। कुछ साल पूर्व एक निजी कंपनी ने मसौढ़ी में जल की गुणवता को लेकर सर्वेक्षण किया था। कंपनी के मुताबिक मसौढ़ी ब्लॉक के पास का पानी 350 से 400 टीडीएस, गांधी मैदान के पास 400 टीडीएस और गांधी मैदान के पश्चिमी इलाके के पानी का 300 से 400 टीडीएस था।

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    क्या कहते हैं लोग

    डिब्बा बंद पानी शुद्ध होता है। नल जल के पानी की शुद्धता पर भरोसा नहीं है। नल जल के पाइप फटे होने पर उसमें बैक्टीरिया के होने की आशंका होती है जिससे परिवार के सदस्य बीमार पड़ सकते हैं।परिवार के सदस्यों को बीमारी से बचाने और उन्हें स्वस्थ रखने के लिए डिब्बा बंद पानी का प्रयोग पेयजल के रूप में करते हैं।-मृत्युंजय पांडेय, तारेगना गोला

    मोहल्ले के पइन में शहर के नाला का पानी गिरता है जिससे समरसेबुल का पानी भी गंदा हो गया है।तीन बार बोरिंग कराने के बावजूद पानी में झाग देता है।इस कारण डिब्बाबंद पानी पीना मजबूरी बन गई है।- सुधीर कुमार, वीर कुंवर सिंह काॅलोनी, सरवां

    दूर से पानी लाना पड़ता है। इसलिए डिब्बाबंद पानी पीते हैं।पानी भी ठंडा रहता है।- मुकेश कुमार पटेल, लखीबाग

    डिब्बाबंद पानी ठीक रहता है। ठंडा रहता है। इसकी क्वालिटी भी अच्छी होती है।- अभिषेक केसरी,संघतपर

    डिब्बाबंद पानी शुद्ध होता है।साथ ही घर में पीने के पानी का कोई अन्य स्रोत नहीं है।यह अधिक सुविधाजनक भी है।फोन करने पर घर पर आकर पहुंचा जाता है।- राजेश कुमार उर्फ पिंटू रजक,अस्पताल रोड, बढई टोला

    ग्राहक का भी डिब्बाबंद पानी का डिमांड रहता है।अन्य स्रोत से पानी लाने में परेशानी होती है।- पिंटू कुमार,कपड़ा दुकानदार, सतीस्थान