बिहार के पाटलिपुत्र स्टेशन पर बवाल, पुलिस फायरिंग नहीं करती तो लगा देते आग; IG ने कहा- ये छात्र नहीं हो सकते
पाटलिपुत्र स्टेशन पर उपद्रवियों ने पांच घंटे तक जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस को हवाई फायरिंग कर स्थिति को ...और पढ़ें

स्टेशन पर छात्रों का प्रदर्शन। फोटो जागरण
HighLights
पाटलिपुत्र स्टेशन पर पांच घंटे तक चला उपद्रव।
पुलिस ने हवाई फायरिंग कर भीड़ को खदेड़ा।
हिंसक झड़प में 40-50 पुलिसकर्मी हुए घायल।
जागरण संवाददाता, पटना। पाटलिपुत्र स्टेशन पर उपद्रवियों ने जमकर तांडव मचाया। पांच घंटे तक पाटलिपुत्र स्टेशन रणक्षेत्र में बना रहा। हंगामे की सूचना मिलते ही 12 एसडीपीओ, छह एसपी, दस थानों की पुलिस और आरपीएफ ने मोर्चा संभाल लिया।
स्थिति इस कदर बेकाबू हो गई थी कि पुलिस को आत्मरक्षार्थ और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हवाई फायरिंग का सहारा लेना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, अगर समय रहते हवाई फायरिंग नहीं की जाती तो उग्र भीड़ पूरे रेलवे स्टेशन को फूंक देती। हिंसक झड़प में 40 से 50 पुलिस पदाधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
भड़क गया अभ्यर्थियों का हुजूम
घटना की शुरुआत तब हुई जब उपद्रवियों की भीड़ ने पाटलिपुत्र स्टेशन के प्लेटफार्म के समीप जेपी सेतु छोर के पास एक ट्रेन को रोक दिया। शुरुआती चरण में रेल और स्थानीय पुलिस को लगा कि यह ट्रेन रोकने और छोटा-मोटा हंगामा करने का सामान्य मामला है।
पुलिस प्रशासन ने माइक के जरिए पटरी पर मौजूद अभ्यर्थियों को समझाना और शांत कराने का प्रयास किया। ट्रेन हटने के लिए माइकिंग की। हालांकि, जब बार-बार की समझाइश का कोई असर नहीं हुआ, तो पुलिस ने बल प्रयोग करने की चेतावनी दी।
माइकिंग के जरिए मिली इस चेतावनी से अभ्यर्थी अचानक उग्र हो गए और उन्होंने रेलवे ट्रैक से पत्थर उठाकर पुलिस बल पर बरसाना शुरू कर दिया।
आइजी के मैसेज फ्लैश होते ही छावनी में तब्दील हो गया स्टेशन
जैसे ही पत्थरबाजी शुरू हुई, नियंत्रण कक्ष से रेल अधिकारियों और पटना पुलिस के वरीय पदाधिकारियों ने स्थानीय थानों को तुरंत पाटलिपुत्र स्टेशन पहुंचने का संदेश फ्लैश किया। जब तक अतिरिक्त बल मौके पर नहीं पहुंचा, पुलिसकर्मी पीछे हटकर स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों को शांत करने की कोशिश करते रहे।
इसके बाद आधे घंटे के भीतर पूरा प्लेटफार्म पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। 12 एसडीपीओ, छह एसपी, दस थानों की पुलिस के साथ-साथ अतिरिक्त पुलिस बल और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मोर्चा संभाल लिया।
पुलिस जैसे ही उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आगे बढ़ी, दूसरी तरफ से पत्थरबाजी और तेज हो गई। उपद्रवी पत्थर मारते हुए प्लेटफार्म की तरफ बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर उन्हें पीछे खदेड़ा।
आइजी ने पिस्टल काक कर हवाई फायरिंग शुरू की
दोगनी रफ्तार से पथराव होने से कई जवान चोटिल हो गए। जब उपद्रवी प्लेटफार्म पर चढ़कर रेलवे कार्यालयों में तोड़फोड़ करने और स्टेशन को आग के हवाले करने की मंशा से बिल्कुल करीब पहुंच गए, तब आइजी जितेंद्र राणा ने खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने अपनी पिस्टल निकालकर काक की और दनादन हवाई फायरिंग शुरू कर दी।
आइजी को फायरिंग करते देख अन्य पुलिस पदाधिकारियों ने भी हवा में गोलियां चलाईं। गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजते ही उपद्रवियों में भगदड़ मच गई और वे पीछे हटने को मजबूर हुए।
आइजी ने बताया कि अभ्यर्थियों की आड़ में सैकड़ों की संख्या में उपद्रवी शामिल थे, जो छात्र नहीं हो सकते। करीब पांच घंटे तक पाटलिपुत्र स्टेशन रणक्षेत्र बना रहा, जिसमें रेलवे वेंडरों की दुकानों के शीशे भी टूट गए।
विशेष ट्रेनों की मौजूदगी के बाद भी किया गया हंगामा : डीएम
डीएम त्यागराजन एसएम ने बताया कि आधी रात के आसपास प्रशासन को कुछ लोगों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिली थी। प्रशासन की ओर से बार-बार गुजारिश की गई कि वे हंगामा न करें और परीक्षा देने वाले अन्य छात्रों का सहयोग करें।
इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने बार-बार ट्रेन की इमरजेंसी चेन खींची और अनुचित मांगें रखीं। उपद्रवियों द्वारा विशेष ट्रेनों की मांग की जा रही थी, जबकि प्रशासन द्वारा पहले से ही दो स्पेशल ट्रेनें वहां उपलब्ध कराई गई थीं।
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