पटना एयरपोर्ट का रनवे बढ़ाने का खाका तैयार, अब बिहार सरकार को लेना है फैसला
केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने पटना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार की रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंप दी है, जिसमें 2,072 मीटर से 2,372 मीटर तक विस्तार का प्रस्ताव है।

पटना एयरपोर्ट रनवे। फोटो जागरण
HighLights
केंद्र समिति ने पटना एयरपोर्ट रनवे विस्तार रिपोर्ट सौंपी।
रनवे 2,072 से 2,372 मीटर बढ़ाने का प्रस्ताव।
सुरक्षित लैंडिंग हेतु राज्य सरकार को लेना है निर्णय।
विद्या सागर, पटना। जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, पटना के रनवे विस्तार को लेकर अब गेंद राज्य सरकार के पाले में पहुंच गई है।
केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने एयरपोर्ट के रनवे विस्तार, आसपास की भौगोलिक बाधाओं, अतिरिक्त जमीन की जरूरत और प्रस्तावित डिजाइन से संबंधित अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। इसके तहत पटना एयरपोर्ट के 2,072 मीटर लंबे रनवे को 2372 मीटर करने की योजना है।
विकास आयुक्त को सौंपे रिपोर्ट में विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए रनवे को पूर्व दिशा में बढ़ाने और एप्रोच एरिया को बाधामुक्त करने पर जोर दिया गया है।अब राज्य सरकार को जमीन उपलब्ध कराने पर निर्णय लेना है।
उच्चस्तरीय समिति से विमर्श के बाद एयरपोर्ट अथोरिटी आफ इंडिया ने विकास आयुक्त को प्रस्तावित डिजाइन के साथ जमीन के लिए पत्र भी भेज दिया है। विस्तार के बाद पटना एयरपोर्ट का रनवे पटना जू के दो नंबर गेट तक पहुंच जाने की संभावना है।
वर्तमान में पटना एयरपोर्ट का रनवे दो हजार 72 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा है। एएआइ के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दोनों दिशाओं में टेक-आफ के लिए उपलब्ध घोषित दूरी 2,072 मीटर है, लेकिन लैंडिंग के लिए उपलब्ध दूरी 1,938 मीटर और 1,677 मीटर है।
राज्य सरकार को उच्च स्तरीय समिति ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसके अनुसार सॉफ्ट लैंडिंग के लिए रनवे की लंबाई कम से कम 300 मीटर बढ़ाने की अनुशंसा की गई है।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित लैंडिंग के लिए पटना जू की ओर लगभग 500 मीटर लंबाई और 300 मीटर चौड़ाई का अतिरिक्त क्षेत्र महत्वपूर्ण है। तकनीकी टीम इस इलाके का सर्वे कर रही है।
रनवे विस्तार के लिए पूर्व दिशा में पटना जू की 22.50 एकड़, कब्रिस्तान की 0.91 एकड़, लोजपा कार्यालय की 0.92 एकड़, कर्पूरी आयुर्वेदिक वाटिका की 0.05 एकड़, सरकारी आवास की 7.37 एकड़, एसएसजी बिहार पुलिस की 2.12 एकड़ और सड़क की 3.11 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।
इसके पहले के प्रस्तावों में रनवे को 1,584.96 मीटर बढ़ाकर 3,657.6 मीटर करने की योजना थी। लेकिन, अबतक यह संभव नहीं हो सका। अब नई कमेटी ने कम से कम 300 मीटर रनवे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
क्या है हार्ड लैंडिंग?
रनवे की लंबाई कम होने से विमानों को उतरते समय कम जगह मिलती है। ऐसे में विमान को तेजी से नीचे लाकर जमीन पर उतारना पड़ता है, जिससे विमान का जमीन पर अपेक्षाकृत जोर से टकराना या झटके के साथ उतरना हार्ड लैंडिंग कहलाता है।
सामान्य लैंडिंग में पायलट विमान को नियंत्रित ढंग से रनवे पर उतारता है और पहिए अपेक्षाकृत सहज तरीके से रनवे को छूते हैं। यदि लैंडिंग अत्यधिक कठोर हो तो विमान के लैंडिंग गियर, पहियों या अन्य संरचनात्मक हिस्सों पर असर पड़ सकता है। खराब मौसम में या अधिक वजन वाले विमानों को हार्ड लैंडिग में अधिक परेशानी होती है।
सॉफ्ट लैंडिंग के मायने
सॉफ्ट लैंडिंग का मतलब विमान का रनवे पर धीरे और आराम से उतरना है, जिससे जमीन पर उतरते समय यात्रियों को कम झटका महसूस होता है। सॉफ्ट लैंडिंग में विमान के पहिए नियंत्रित और अपेक्षाकृत सहज तरीके से रनवे को छूते हैं।
इसके लिए लंबे रनवे की आवश्यक्ता होती है। पटना में रनवे की लंबाई और आसपास की बाधाओं का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां लैंडिंग के लिए उपलब्ध दूरी दोनों दिशाओं में समान नहीं है। एएआइ के आधिकारिक आंकड़ों में रनवे 25 के लिए एलडीए 1,938 मीटर और रनवे 07 के लिए 1,677 मीटर दर्ज है।
सचिवालय का घंटाघर भी बना एप्रोच एरिया के लिए चुनौती
रनवे विस्तार के साथ एयरपोर्ट के आसपास की ऊंची संरचनाओं को लेकर भी तकनीकी स्तर पर मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार पुराना सचिवालय के घंटाघर की ऊंचाई कम करने के प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
इससे पहले की तकनीकी चर्चाओं में भी पुराने सचिवालय के घंटाघर को विमान के एप्रोच पथ में बाधा के रूप में चिह्नित किए जाने की बात सामने आई थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार 49.5 मीटर ऊंचे घंटाघर को लेकर मानक लैंडिंग एंगल बनाए रखने के लिए ऊंचाई में कमी का विकल्प देखा गया था। रनवे के आसपास केवल जमीन उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा।
विमान जिस दिशा और कोण से रनवे की ओर आता है, उस एप्रोच पथ में आने वाली ऊंची संरचनाओं, पेड़-पौधों और अन्य बाधाओं को भी विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप रखना होगा।
रनवे की लंबाई बढ़ाने से क्या बदलेगा
रनवे को 2,072 मीटर से प्रस्तावित 2,372 मीटर तक बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा विमानों के संचालन के लिए उपलब्ध टेक-आफ और लैंडिंग मार्जिन बढ़ना होगा।
लंबे रनवे से विशेष रूप से अधिक वजन वाले विमानों के लिए संचालन संबंधी सीमाएं कम करने में मदद मिल सकती है। मौजूदा रनवे की लंबाई विमानों पर महत्वपूर्ण ‘लोड पेनल्टी’ डालती है और इससे विमानों के संचालन पर प्रतिबंध आते हैं।
लंबा रनवे होने से फायदा
- विमानों के टेक-आफ और लैंडिंग के लिए अधिक रनवे उपलब्ध होगा।
- गर्मी, हवा और विमान के अधिक वजन जैसी परिस्थितियों में आपरेशनल मार्जिन बेहतर हो सकता है।
- बड़े और अधिक वजन वाले विमानों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी।
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए जरूरी विमान प्रकारों के संचालन की व्यवहार्यता बेहतर हो सकती है।
- रनवे ओवररन जैसे जोखिमों को कम करने के लिए अधिक रनवे दूरी उपलब्ध होगी।
- एयरलाइंस के लिए पटना से लंबी दूरी के मार्गों पर परिचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
मौजूदा रनवे की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ लंबाई नहीं
पटना एयरपोर्ट की समस्या केवल 2,072 मीटर के रनवे तक सीमित नहीं है। एयरपोर्ट के एक तरफ रेलवे और दूसरी तरफ चिड़ियाघर तथा अन्य संरचनाओं के कारण रनवे विस्तार के लिए जमीन जुटाना जटिल है। केंद्र सरकार के स्तर पर भी रनवे विस्तार में इन्हीं भौगोलिक सीमाओं को बड़ी चुनौती माना गया है।
यही कारण है कि समिति की रिपोर्ट में जमीन, संरचनाओं और एप्रोच एरिया को एक साथ देखते हुए समाधान तलाशा गया है। रनवे विस्तार का प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो जमीन अधिग्रहण अथवा हस्तांतरण के साथ प्रभावित संस्थानों और परिसंपत्तियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी करनी होगी।
अब सरकार को लेना है बड़ा फैसला
केंद्र की उच्चस्तरीय समिति के स्तर पर तकनीकी अध्ययन और रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब सबसे अहम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।
कितनी जमीन उपलब्ध कराई जा सकती है, किन परिसंपत्तियों का स्थानांतरण होगा, पटना जू की जमीन को लेकर क्या निर्णय होगा और एप्रोच एरिया की बाधाओं को किस तरह दूर किया जाएगा।
इन सवालों पर सरकार का फैसला परियोजना की दिशा तय करेगा। पटना एयरपोर्ट के लिए यह महज रनवे विस्तार की परियोजना नहीं है।
मौजूदा 2,072 मीटर के सीमित रनवे से 2,372 मीटर के प्रस्तावित रनवे तक पहुंचना एयरपोर्ट की परिचालन क्षमता और विमानन सुरक्षा दोनों में बड़ा बदलाव ला सकता है।
यह भी पढ़ें- पिंडदान करने गयाजी जा रहे हैं? हाटे-बाजारे एक्सप्रेस से जाएं, सुपौल-सहरसा; पूर्णिया और मधेपुरा होकर गुजरेगी
