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19 मार्च से शुरू होगा चैत्र नवरात्र, 22 से चैती छठ; रामनवमी समेत माह के अन्‍य पर्व की क्‍या है तारीख?

Published: Mon, 09 Mar 2026 06:09 PM (GMT+05:30)

Chaitra Navratra 2026: चैत्र मास में पटना में कई प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। 19 मार्च से चैत्र नवरात्र कलश स्थापना ...और पढ़ें

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HighLights

  1. 19 मार्च से चैत्र नवरात्र कलश स्थापना के साथ शुरू।

  2. चैती छठ महापर्व 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ।

  3. रामनवमी का पर्व 27 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा।

जागरण संवाददाता, पटना। चैत्र मास में नवरात्र, चैती छठ, रामनवमी, कामदा एकादशी और चैत्र पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन 19 मार्च को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग में हिन्दू नव संवत्सर का शुभारंभ होगा। नए संवत्सर के पहले दिन गुरुवार होने के कारण राजा गुरु और मंत्री मंगल है।

आचार्य राकेश झा ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही वासंतिक नवरात्र की शुरुआत कलश स्थापना के साथ होगी। नौ दिनों तक श्रद्धालु माता दुर्गा की भक्ति में लीन रहेंगे।

इस दौरान मंदिरों और घरों में वेदमंत्र, घंटी, शंख, आरती और स्तुति की गूंज सुनाई देगी। 25 मार्च को मृगशिरा नक्षत्र और आयुष्मान योग में माता का पट खुलेगा। वहीं 27 मार्च को महानवमी के दिन पाठ का समापन, हवन और कन्या पूजन किया जाएगा। 

22 मार्च को शुरू होगा चैती छठ

चैत्र शुक्ल चतुर्थी 22 मार्च को भरणी नक्षत्र और वैधृति योग में नहाय-खाय के साथ चैती छठ महापर्व की शुरुआत होगी। व्रती गंगा स्नान कर अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी और आंवले की चासनी ग्रहण कर चार दिवसीय व्रत का संकल्प लेंगी।

23 मार्च को कृत्तिका नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास और शाम को खरना की पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करेंगे।

24 मार्च चैत्र शुक्ल षष्ठी को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं 25 मार्च को सप्तमी तिथि में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ सूर्योपासना के इस महापर्व का समापन होगा। 

27 मार्च को मनेगी रामनवमी

नवमी 27 मार्च को पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन मंदिरों और घरों में भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।

हनुमत ध्वज की स्थापना के बाद विधि-विधान से पूजा की जाएगी। शास्त्रों के अनुसार भगवान राम के जन्मोत्सव का उत्सव मनाने से सुख, वैभव, वैवाहिक जीवन में सुख, कीर्ति, यश और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।

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