पटना सिविल कोर्ट को कौन भेज रहा ईमेल? 1 साल में 6 बार मिल चुकी बम से उड़ाने की धमकी
पटना सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम प्लांट (Patna Civil Court Bomb Threats) करने की धमकी मिली है, जिससे परिसर में दहशत फैल गई। पिछले एक साल से लगातार ऐस ...और पढ़ें

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ने को धमकी को लेकर गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात। (जागरण)
HighLights
पटना सिविल कोर्ट को छठी बार बम धमकी मिली।
पुलिस जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।
धमकी देने वालों की पहचान या गिरफ्तारी नहीं हुई।
जागरण संवाददाता, पटना।सिविल कोर्ट में एक बार फिर बम प्लांट किए जाने का धमकी भरा ई-मेल मिला और परिसर दहशत के माहौल में तब्दील हो गया।
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। करीब एक साल में इस तरह का छह बार धमकी भरा संदेश मिल चुका है। यह और बात है कि पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की छानबीन में ऐसा कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिला।
पुलिस केस भी दर्ज की, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इस तरह की धमकी भरा संदेश कौन भेज रहा है? इसके पीछे उनकी मंशा क्या है? कहां से धमकी भरा ईमेल भेजा जा रहा है? इनमें से किसी भी मामले में पटना पुलिस गिरफ्तारी तो दूर, आरोपितों का नाम तक उजागर नहीं कर सकी।
पुलिस की कार्रवाई इस यहीं तक सिमटी रहती है कि मामले की तकनीकी जांच की जा रही है। सिटी एसपी भानू प्रताप सिंह ने बताया कि सोमवार को कोर्ट परिसर की गहन छानबीन की गई। कुछ भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिला। मामले की जांच के लिए तकनीकी सेल के साथ ही अन्य जांच एजेंसी से भी सहयोग लिया जा रहा है।
धमकी के बाद प्रभावित होता है कोर्ट का कार्य
बीते आठ जनवरी ईमेल से पटना व्यवहार न्यायालय परिसर में तीन आरडीएक्स विस्फोट करने की धमकी मिली थी। सूचना बाहर आते ही न्यायालय परिसर में अफरा‑तफरी मच गई थी। 28 जनवरी को बिहार में कई कोर्ट में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बम से उड़ाने की धमकी की सूचना मिली।
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इसमें मुजफ्फरपुर सिविल कोर्ट, सिवान सिविल कोर्ट, बेगूसराय सिविल कोर्ट, भागलपुर सिविल कोर्ट आदि शामिल हैं। वर्ष 2025 के 25 अप्रैल और 16 अक्टूबर को भी इसी तरह के धमकी भरे संदेश आए थे।
हर बार पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर न्यायालय परिसर को भी खाली कराकर जांच करवाई। जांच में सूचना झूठी साबित हुई। इस तरह की धमकी के बाद वहां का कार्य भी प्रभावित होता है।
संसाधन के बाद भी चूक जा रही पुलिस
अधिकांश धमकी भरा संदेह ई-मेल पर मिला। जिन आईपी एड्रेस से ईमेल भेजा जा रहा है, उसकी जांच की बात कहीं जाती है। थाना पुलिस के साथ साइबर थाना के साथ जांच के लिए अलग से तकनीकी टीम भी है। तकनीकी जांच के लिए संसाधन होने के बाद भी पुलिस आरोपितों तक नहीं पहुंच पा रही है।
ऐसा नहीं है इस तरह की धमकी भरा संदेह सिर्फ बिहार के कोर्ट में मिली है। जनवरी 2025 में जयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट, जून 2025 में गुजरात हाईकोर्ट और जुलाई 2025 में हिमाचल प्रदेश में भी इस तरह की धमकी मिली थी। हिमाचल प्रदेश की पुलिस इस मामले में केरल पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार की थी।