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    पटना में फैला फर्जी अधिकारी बन ठगी का जाल, 5 साल में तीन गुना बढ़े मामले; सबसे ज्यादा कारोबारी प्रभावित

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 07:45 PM (IST)

    पटना में सरकारी एजेंसियों के फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गिरोहों के मामले पांच साल में तीन गुना बढ़ गए हैं। ये अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी के नाम प ...और पढ़ें

    एआई जनरेटेड फोटो

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    HighLights

    1. फर्जी अधिकारी बन ठगी के मामले तीन गुना बढ़े।

    2. कारोबारी और बुजुर्ग मुख्य रूप से शिकार बन रहे हैं।

    3. पुलिस, सीबीआई के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी।

    जागरण संवाददाता, पटना। पटना में सरकारी एजेंसियों के नाम पर आम लोगों को मानसिक दबाव में लेकर ठगी करने वाले गिरोहों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज घटनाओं के आधार पर पिछले पांच वर्षों में पटना की सड़कों पर फर्जी अधिकारी बनकर रौब दिखाने और ठगी करने के मामलों का ग्राफ साल-दर-साल तेजी से ऊपर गया है, जो अब लगभग तीन गुना तक बढ़ चुका है।

    पुलिस, सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग का फर्जी अधिकारी बनकर ये शातिर अपराधी आम लोगों, विशेषकर कारोबारियों और बुजुर्गों को बीच सड़क पर अपना शिकार बना रहे हैं।

    डराने और रौब जमाने के लिए ये अपराधी कानूनी कार्रवाई, कागजात की कमी और नकली वाहन जांच का सहारा ले रहे हैं, जिसके कारण पीड़ित घबराकर अपनी जमापूंजी गंवा बैठते हैं।

    57 प्रतिशत मामलों में कारोबारी व बुजुर्ग बने शिकार

    इस गिरोह के निशाने पर सबसे ज्यादा समाज का वह वर्ग होता है जो कानूनी पचड़ों से दूर रहना चाहता है। अपराधी बहुत बारीकी से रेकी करते हैं और ऐसे लोगों को चुनते हैं जो सड़क पर अकेले हों या आसानी से डर जाएं। सड़क पर चल रहे इन गिरोहों का शिकार होने वाले लोगों में व्यापारियों की संख्या सबसे अधिक 32 प्रतिशत है, क्योंकि वे अक्सर नकदी या व्यापारिक सिलसिले में बाहर निकलते हैं।

    इसके अलावा अकेले सफर कर रहे बुजुर्ग भी 25 प्रतिशत मामलों में इनका आसान निशाना बनते हैं। कुल मिलाकर देखें तो 57 प्रतिशत मामलों में केवल कारोबारी और बुजुर्ग ही इन अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं।

    वहीं, अन्य प्रभावित वर्गों में नौकरीपेशा लोग 18 प्रतिशत, कामकाजी महिलाएं 15 प्रतिशत और छात्र व अन्य वर्ग 10 प्रतिशत के साथ शामिल हैं।

    पुलिस और सीबीआई के नाम पर सबसे ज्यादा खौफ

    दर्ज मामलों की जांच की गई तो पता चला कि अपराधियों को जनता को डराने के लिए सबसे आसान पुलिस विभाग का नाम लगता है। सबसे ज्यादा 41 प्रतिशत मामलों में अपराधी खुद को स्थानीय पुलिस या ट्रैफिक विंग का दस्ता बताते हैं।

    इसके बाद देश की बड़ी जांच एजेंसियों जैसे सीबीआई का खौफ 26 प्रतिशत मामलों में पैदा किया जाता है। इसके अलावा ईडी के नाम पर 12 प्रतिशत और आयकर विभाग के नाम पर 9 प्रतिशत मामलों में ठगी को अंजाम दिया गया। अन्य सरकारी विभागों के नाम का सहारा 12 प्रतिशत मामलों में लिया गया है।

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    घबराएं नहीं, सतर्कता ही एकमात्र बचाव: एसपी

    सेंट्रल एसपी ममता कलयाणी ने बताया कि कोई भी असली पुलिसकर्मी या केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी सड़क पर बिना वैध वारंट या आधिकारिक प्रक्रियाओं के किसी को प्रताड़ित नहीं कर सकता और न ही मौके पर इस तरह अवैध वसूली करता है।

    यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर सड़क पर डराने या जबरन गाड़ी रोकने की कोशिश करे, तो बिना डरे तुरंत आस-पास के लोगों को इकट्ठा करें, नजदीकी थाने को सूचित करें या संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर सत्यता की जांच करें।

    क्या कहते हैं आंकड़े?

     2021: 6 मामले

    2022: 8 मामले

    2023: 11 मामले

    2024: 14 मामले

    2025: 18 मामले

    किस नाम का कितना दुरुपयोग?

    पुलिस (लोकल पुलिस-ट्रैफिक): 41 प्रतिशत
    सीबीआइ: 26 प्रतिशत
    ईडी: 12 प्रतिशत
    आयकर विभाग: 9 प्रतिशत
    अन्य सरकारी विभाग: 12 प्रतिशत

    सबसे ज्यादा प्रभावित वर्ग

    कारोबारी: 32 प्रतिशत
    बुजुर्ग: 25 प्रतिशत
    नौकरीपेशा: 18 प्रतिशत
    महिलाएं: 15 प्रतिशत
    छात्र व अन्य: 10 प्रतिशत

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