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बिहार में जमीन मालिकों को राहत: अब अतिक्रमण के नाम पर नहीं चलेगी मनमानी, पटना HC ने तय किए नियम

Updated: Fri, 14 Aug 2026 08:36 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने रैयती जमीन को सरकारी बताकर भू-धारकों को अतिक्रमण के मुकदमों में फंसाने पर कड़ा रुख अपनाया है।

गलत अतिक्रमण केस में भू-धारकों को नहीं करें परेशान, पहले खसरा-खतियान व जमाबंदी मिलाएं : हाई कोर्ट

गलत अतिक्रमण केस में भू-धारकों को नहीं करें परेशान, पहले खसरा-खतियान व जमाबंदी मिलाएं : हाई कोर्ट

HighLights

  1. अतिक्रमण शिकायत पर गहन जांच अनिवार्य।

  2. राजस्व अभिलेखों की जांच के बिना नोटिस नहीं।

  3. राज्य को सिविल कोर्ट में जाना होगा विवादों के लिए।

विधि संवाददाता, पटना। रैयती जमीन को सरकारी बताकर भू-धारकों को अतिक्रमण के मुकदमे में फंसाने पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश राज कुमार की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण की शिकायत मिलते ही कलेक्टर या अंचल अधिकारी बिना राजस्व अभिलेखों की गहन जांच किए संबंधित भू-धारक को नोटिस जारी नहीं कर सकते।

पहले जमाबंदी, खतियान, रजिस्टर-2 और जमीन से जुड़े अन्य दस्तावेजों का मिलान कर यह तय करना होगा कि जमीन वास्तव में सार्वजनिक है या रैयती।

अशर्फी यादव की याचिका मंजूर करते हुए कोर्ट ने मधुबनी के अंचल अधिकारी और कलेक्टर के अतिक्रमण संबंधी आदेश निरस्त कर दिए।

कोर्ट ने कहा कि बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 केवल सार्वजनिक जमीन पर लागू होता है। लंबे समय से चली आ रही जमाबंदी और पुराने बंदोबस्त को महज राजस्व रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण की कार्यवाही के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में राज्य को सक्षम सिविल कोर्ट में जाकर जमाबंदी या बंदोबस्त रद कराने की कार्रवाई करनी होगी।

क्या है हाईकोर्ट द्वारा जारी किए दिशा-निर्देश:

1. शिकायत की प्रारंभिक जांच कर ही अतिक्रमण की कार्यवाही शुरू करें।
2. दो सप्ताह का समय देकर नोटिस जारी किया जाए।
3. संबंधित पक्ष को जवाब और साक्ष्य पेश करने का पूरा मौका मिले।
4. कलेक्टर/सीओ साक्ष्यों और राजस्व अभिलेखों की जांच करें।
5. जमाबंदी, खतियान और रजिस्टर-2 अनिवार्य रूप से देखें।
6. कोर्ट के डिक्री/टाइटल संबंधी आदेश और पुराने बंदोबस्त भी जांचें।
7. लंबे समय की जमाबंदी दस्तावेजों से समर्थित हो तो उसे बोना फाइड विवाद मानें।
8. ऐसे विवाद में राज्य को सिविल कोर्ट में जमाबंदी/बंदोबस्त रद्द कराने जाना होगा।
9. जमीन पर अधिकार का कोई दस्तावेज न देने वाले व्यक्ति को अपने दावे का अधिकार सिविल कोर्ट से साबित करना होगा।
10. फर्जी/दुर्भावनापूर्ण शिकायत पाए जाने पर शिकायतकर्ता के खिलाफ बीएनएस की धारा 248 में कार्रवाई हो।

कोर्ट ने माना कि ऐसे गलत मामलों से रैयतों को अनावश्यक परेशानी होती है और हाईकोर्ट में मुकदमों का बोझ बढ़ता है। इसलिए आदेश की प्रति राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया गया है।