कैदियों की सजा में छूट पर नहीं चलेगी मनमानी, पटना हाई कोर्ट का बिहार सरकार पर शिकंजा
पटना हाई कोर्ट ने बिहार की जेलों में कैदियों की सजा में छूट (रिमिशन) को लेकर राज्य सरकार और जेल प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

कैदियों की सजा में छूट पर नहीं चलेगी मनमानी, पटना हाई कोर्ट का बिहार सरकार पर शिकंजा
HighLights
रिमिशन प्रक्रिया पारदर्शी और नियम-आधारित होनी चाहिए।
कैदियों को सुनवाई का अवसर दिए बिना छूट वापस नहीं।
अशिक्षित कैदियों को भी रिमिशन लाभ मिलना चाहिए।
विधि संवाददाता, पटना। बिहार की जेलों में बंद कैदियों की सजा में छूट (रिमिशन) को लेकर पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और जेल प्रशासन की जवाबदेही तय करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश चंद्रशेखर झा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि रिमिशन की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। कैदी को दी गई छूट को मनमाने ढंग से वापस नहीं लिया जा सकता।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर कैदी को उसके हिस्ट्री टिकट की डुप्लीकेट प्रति दी जाए, ताकि उसे यह पता रहे कि उसे कितनी छूट मिली और कितनी काटी गई। किसी रिमिशन को जब्त करने या घटाने से पहले कैदी को सुनवाई का अवसर देना और कारण सहित आदेश पारित करना जरूरी होगा।
अनपढ़ कैदियों को भी समान अवसर
कोर्ट ने कहा कि अशिक्षित होना किसी कैदी को सुधारात्मक गतिविधियों के आधार पर मिलने वाले लाभ से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता। सरकार को अनपढ़ कैदियों के लिए ऐसा वैकल्पिक रास्ता तैयार करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है, जिससे वे भी अतिरिक्त रिमिशन अर्जित कर सकें।
समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया में अधिकारियों की देरी रोकने के लिए अलग-अलग स्तर पर समय-सीमा तय करने की सिफारिश की गई है। तय अवधि में रिपोर्ट नहीं भेजे जाने की स्थिति को कैदी के पक्ष में मानने का प्रावधान भी सुझाया गया है।
कोर्ट ने सभी पात्र आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों का विवरण और रिमिशन संबंधी जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने की सिफारिश की है।
राज्य को 32 लंबित मामलों का अद्यतन ब्योरा चार सप्ताह में राज्य सजा छूट बोर्ड के समक्ष रखने तथा चार माह में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। फैसले की प्रति मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रधान सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
