पटना में मांस-मछली की 1420 दुकानों में से सिर्फ 12 के पास लाइसेंस, निगम की कार्रवाई अब भी सुस्त
पटना में मांस-मछली की अवैध दुकानों पर नगर निगम की कार्रवाई धीमी है। 1,420 दुकानों में से केवल 12 के पास वैध लाइसेंस है, जबकि अधिकांश बिना अनुमति चल रह ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड तस्वीर
HighLights
पटना में 1,420 में से सिर्फ 12 मांस-मछली दुकानों के पास लाइसेंस।
नगर निगम की अवैध दुकानों पर कार्रवाई अब तक अप्रभावी रही।
अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में संचालन, नियमों का लगातार उल्लंघन जारी।
जागरण संवाददाता, पटना। शहर में मांस-मछली की अवैध दुकानों पर कार्रवाई को लेकर नगर निगम का अभियान अब तक असरदार साबित नहीं हो सका है। नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के करीब एक माह बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
नगर निगम क्षेत्र में संचालित 1,420 मांस-मछली दुकानों में से महज 12 दुकानों के पास ही वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) है, जबकि बाकी दुकानें नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं।
हालांकि निगम की ओर से 686 दुकानों को खुले में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा 1,135 दुकानों को अनुज्ञप्ति निर्गत कराने के लिए नोटिस भी जारी किया गया है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर अवैध दुकानों का संचालन जारी है।
मृत पशुओं को खुले में प्रदर्शित किया जा रहा
नगर आयुक्त यशपाल मीणा द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि बिना अनुज्ञप्ति संचालित दुकानें बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के प्रविधानों का उल्लंघन कर रही हैं।
विभाग के संज्ञान में यह भी आया है कि कई दुकानों में अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में मांस की बिक्री की जा रही है और मृत पशुओं को खुले में प्रदर्शित किया जा रहा है। साथ ही कई दुकानें धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों एवं भीड़-भाड़ वाले इलाकों के समीप संचालित हो रही हैं।
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सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे मांस-मछली दुकानों का सर्वे कर नई अनुज्ञप्ति जारी करें और बिना लाइसेंस संचालित दुकानों को धारा 345(4) के तहत बंद करें।
इसके साथ ही ऑनलाइन डिजिटल रिकॉर्ड, जियो टैग फोटो और दैनिक प्रतिवेदन भी उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके बावजूद अब तक कार्रवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है, जिससे निगम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
दो अंचलों में 11 आवेदन खारिज
नूतन राजधानी अंचल में 10 मार्च को जांच के बाद आठ आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। वहीं कंकड़बाग अंचल में 13 मार्च को तीन आवेदन खारिज किए गए, क्योंकि इनमें आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं थे। संबंधित आवेदकों को अब नए सिरे से आवेदन करना होगा। कंकड़बाग अंचल में अनुज्ञप्ति के लिए 57 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच प्रक्रिया जारी है।
| अंचल | कुल दुकानें | अनुज्ञप्ति प्राप्त | प्रतिबंधित दुकानें | नोटिस |
|---|---|---|---|---|
| नूतन राजधानी | 313 | 0 | 299 | 313 |
| पाटलिपुत्र | 359 | 8 | 145 | 130 |
| कंकड़बाग | 308 | 0 | 49 | 252 |
| बांकीपुर | 225 | 0 | 139 | 225 |
| पटना सिटी | 28 | 3 | 10 | 28 |
| अजीमाबाद | 187 | 1 | 44 | 187 |
विनियम में अनुज्ञप्ति अनिवार्य, उल्लंघन पर कार्रवाई के प्रविधान
नगर निगम ने मानव खाद्य से जुड़े पशु मांस, मछली एवं कुक्कुट के कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए पटना नगर निगम (पशु मांस, मछली या कुक्कुट विक्रय) अनुज्ञप्ति विनियम, 2014 लागू किया है।
विनियम के तहत बिना निगम से अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) लिए कोई भी व्यक्ति मांस, मछली या कुक्कुट का व्यापार नहीं कर सकेगा। कारोबार शुरू करने से पहले निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना अनिवार्य है। पहले से व्यवसाय कर रहे लोगों को भी प्रकाशन के 30 दिनों के भीतर आवेदन करना होगा।
नियम का उल्लंघन करने पर हर बार 2000 रुपये जुर्माना
नियम का उल्लंघन करने पर हर बार 2000 रुपये जुर्माना और सामग्री जब्त की जाएगी। आवेदन मिलने के बाद निगम द्वारा स्थल निरीक्षण कराया जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी अंतिम निर्णय लेंगे।
लाइसेंस जारी करने से पहले 2000 रुपये शुल्क जमा करना होगा, जबकि गरीबी रेखा से नीचे के आवेदकों से मात्र 20 रुपये आदेशिका शुल्क लिया जाएगा। लाइसेंस का वार्षिक नवीकरण भी जरूरी है। देरी होने पर 300 रुपये प्रतिमाह की दर से जुर्माना लगेगा, लेकिन तीन माह के बाद नवीकरण नहीं होगा और व्यवसाय परिसर बंद कर दिया जाएगा।
विनियम में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और स्वास्थ्य सुरक्षा के सख्त प्रावधान किए गए हैं। बिना अधिकृत मुहर वाले मांस की बिक्री पर रोक है। गंदगी, पर्यावरण प्रदूषण, या नियम उल्लंघन की स्थिति में लाइसेंस निलंबित या रद किया जा सकता है।
निगम ने स्पष्ट किया है कि सभी लाइसेंसधारियों को अपने प्रतिष्ठान पर लाइसेंस प्रदर्शित करना होगा और समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा, ताकि आमजन के स्वास्थ्य और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।