पटना में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा भंडाफोड़, एक्सपायरी डेट बदलकर बाजार में खपाने का खेल
पटना में सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। अगमकुआं थाना क्षेत्र में औषधि नियंत्रण प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त छापेमारी कर करीब 40 ला ...और पढ़ें

सरकारी दवाओं की कालाबाजारी का बड़ा भंडाफोड़
HighLights
पटना में 40 लाख की सरकारी दवाएं जब्त।
एक्सपायरी डेट बदलकर बेची जा रही थीं दवाएं।
एक गिरफ्तार, मुख्य आरोपी सहित चार फरार।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी में सरकारी अस्पतालों के लिए आने वाली मुफ्त दवाओं की कालाबाजारी का भंडाफोड़ हुआ है। अगमकुआं थाना क्षेत्र के भागवत नगर स्थित जनता नगर में सोमवार को औषधि नियंत्रण प्रशासन और पटना पुलिस की संयुक्त छापेमारी में करीब 40 लाख रुपये की दवाएं और इंजेक्शन जब्त किए गए हैं।
मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अन्य की तलाश की जा रही है। छापेमारी में गिरफ्तार आरोपित की पहचान जयंत कुमार के रूप में हुई है।
वहीं मुख्य आरोपित नीरज कुमार सहित कुंदन कुमार और मकान मालिक अजय कुमार फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। मौके से 38 कार्टून में रखी बड़ी मात्रा में दवाएं बरामद हुईं।
रैपर बदलकर की जा रही थी बिक्री
जांच में सामने आया कि गिरोह सरकारी अस्पतालों से सस्ते दाम पर दवाएं खरीदकर गोदाम में जमा करता था। यहां दवाओं से “सरकारी आपूर्ति” का लेबल हटाकर उन पर निजी कंपनियों के रैपर चढ़ा दिए जाते थे। इतना ही नहीं, एक्सपायर हो चुकी दवाओं की तारीख बदलकर उन्हें बाजार में खपाया जा रहा था।
बताया गया कि तैयार दवाओं को पटना समेत राज्य के विभिन्न दवा दुकानों तक सप्लाई किया जाता था। इस अवैध नेटवर्क में एक दर्जन से अधिक लोग शामिल बताए जा रहे हैं। अब इसकी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
प्रशासन का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाओं की आपूर्ति सुरक्षित और पारदर्शी बनी रहे।
जीवनरक्षक दवाएं भी शामिल
बरामद दवाओं में कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें एल्बुमिन, कोडिन, प्राजोसिन, बुप्रेनार्फिन, एंटी-रेबीज इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स, सेफिक्साइम, एमोक्सिसिलिन-क्लैवुलनेट, सेफ्ट्रिएक्सोन, मेरोपेनेम और एरिथ्रोपोइटिन जैसे इंजेक्शन शामिल हैं।
दो वर्षों से चल रहा था खेल
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह गिरोह करीब दो वर्षों से बिचौलियों के माध्यम से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था। सरकारी अस्पतालों की आपूर्ति से जुड़ी दवाओं की हेराफेरी कर उन्हें खुले बाजार में बेचा जा रहा था।
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छापेमारी सहायक औषधि नियंत्रक चुनेंद्र महतो के निर्देशन में की गई, इसका नेतृत्व ड्रग इंस्पेक्टर जितेंद्र कुमार व अंसारी ने किया। गोदाम को सील कर दिया गया है और जब्त दवाओं की जांच कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।