विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

5 साल से बेड़ियों में जकड़ा है पटना का मैट्रिक पास आदित्य, दो भाई भी ठीक नहीं; अशोक ठाकुर की दर्दभरी कहानी

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:04 AM (IST)

मोकामा के अशोक ठाकुर अपने तीन बेटों की मानसिक बीमारी और बदहाली से जूझ रहे हैं, जहां एक बेटा पांच ...और पढ़ें

मजबूर प‍िता अशोक ठाकुर और बेड़‍ियों में जकड़ा आदित्‍य। जागरण

मजबूर प‍िता अशोक ठाकुर और बेड़‍ियों में जकड़ा आदित्‍य। जागरण

HighLights

  1. मोकामा के अशोक ठाकुर के तीन बेटे मानसिक रूप से बीमार।

  2. बेटा आदित्य पांच साल से जंजीरों में बंधा, दूसरा लापता।

  3. आर्थिक तंगी से जूझता परिवार, इलाज के लिए मदद की आस।

संवाद सूत्र, मोकामा (पटना)। मोकामा नगर के रामचरण टोला, वार्ड संख्या 14 में रहने वाले अशोक ठाकुर की जिंदगी तीन बेटों की बीमारी और बदहाली के बीच सिमटकर रह गई है।

उनके तीनों जवान बेटों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। बड़ा बेटा दीपक कुमार पिछले दो वर्षों से लापता है, छोटा बेटा मन्नु ठाकुर नगर की नालियों से कचरा निकालता फिरता है। 

मझला बेटा आदित्य आनंद पिछले पांच वर्षों से घर में जंजीरों से बंधा हुआ है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि पिता के पास अब बेटों के इलाज के लिए भी पैसे नहीं बचे हैं।

कमाने वाला युवक अचानक हो गया बीमार 

मैट्रिक पास आदित्य कभी शादी समारोहों में वीडियोग्राफी का काम करता था। परिवार के मुताबिक, करीब पांच वर्ष पहले अचानक उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा।

शुरुआत में स्वजन ने इसे जादू-टोने का असर समझा और झाड़-फूंक कराई। इससे कोई सुधार नहीं हुआ तो पटना से रांची तक उसका इलाज कराया गया।

बेटे को ठीक करने की कोशिश में मां के गहने तक बिक गए। पिता ने कर्ज लेकर भी इलाज कराया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण आगे उपचार जारी रखना मुश्किल हो गया।

अशोक ठाकुर के अनुसार, आदित्य का व्यवहार धीरे-धीरे आक्रामक होता गया। वह घर के सदस्यों के साथ मारपीट करने लगा। इसी दौरान वह कई बार घर से निकलकर लापता हो गया।

एक बार कोलकाता पहुंच गया तो दूसरी बार पंजाब होते हुए राजस्थान के पास पाकिस्तान सीमा तक जा पहुंचा। हर बार पिता उधार लेकर उसकी तलाश में निकले और किसी तरह उसे वापस घर लाए।

लेकिन कुछ ही समय बाद वह फिर घर से गायब हो जाता था। लगातार इस परेशानी से जूझने और बेटे की सुरक्षा की चिंता में पिता ने उसके पैरों में जंजीर बांध दी। पिछले पांच वर्षों से आदित्य इसी स्थिति में रह रहा है।

एक बेटे की तलाश, दूसरे की चिंता

आदित्य की हालत का असर परिवार के दूसरे बेटों पर भी पड़ा। पिता के मुताबिक, बड़े बेटे दीपक की मानसिक स्थिति भी बिगड़ गई।

करीब दो साल पहले वह घर से निकला तो फिर वापस नहीं लौटा। परिवार को आज तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

छोटा बेटा मन्नु भी मानसिक परेशानी से जूझ रहा है। वह नगर की नालियों से कचरा निकालने और इधर-उधर घूमने में लगा रहता है।

तीनों बेटों को संभालने में टूट रहे पिता 

अशोक ठाकुर की पत्नी सुनीता देवी भी करीब 20 वर्ष पहले उनका साथ छोड़ चुकी हैं। तीन बेटों की इस हालत के बीच अशोक अकेले ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

आर्थिक तंगी और लगातार संघर्ष ने उन्हें तोड़कर रख दिया है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पहले जैसी मदद नहीं मिलती। अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बेटों का इलाज और उनकी देखभाल है।

तीन जवान बेटों की इस स्थिति ने अशोक ठाकुर को बेबस कर दिया है। जिस बेटे को पढ़ा-लिखाकर अपने पैरों पर खड़ा देखना चाहते थे, वह पांच वर्षों से जंजीरों में है।

पिता को अब किसी ऐसी मदद की उम्मीद है, जिससे बेटों का समुचित उपचार हो सके और परिवार फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट सके।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।