पटना में नमामि गंगे के मैनहोल में बगैर सुरक्षा के उतरे 2 भाई, जहरीली गैस से 1 की मौत
पटना में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत मैनहोल की सफाई के दौरान जहरीली गैस से एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि उसका भाई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। ...और पढ़ें

पटना में नमामि गंगे के मैनहोल में बगैर सुरक्षा के उतरे 2 भाई, जहरीली गैस से 1 की मौत (AI Generated Image)
HighLights
नमामि गंगे प्रोजेक्ट में मैनहोल सफाई के दौरान हादसा।
जहरीली गैस से एक मजदूर की मौत, भाई गंभीर।
सुरक्षा उपकरणों की कमी और लापरवाही बनी मौत का कारण।
जागरण संवाददाता, पटना। नमामी गंगे प्रोजेक्ट में महज 30 हजार रुपये की सेफ्टी किट की कमी के कारण एक मजदूर की मौत हो गई। एक का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। घटना सोमवार देर रात की है। पटना के श्रीकृष्णापुरी थाना क्षेत्र के एएन कॉलेज स्थित पानी टंकी के पास 20 वर्षीय मजदूर 30 फीट गहरे मैनहोल की सफाई के लिए उतरा था।
जहरीली गैस के रिसाव से दम घुटने के कारण उसकी मौत हो गई, जबकि उसे बचाने नीचे उतरा उसका भाई भी बेहोश हो गया, जो फिलहाल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। दोनों भाई बिना किसी सुरक्षा उपकरण के करीब ढाई घंटे तक 30 फीट नीचे मैनहोल में फंसे रहे।
हादसे के शिकार दोनों मजदूर पश्चिम बंगाल के मालदा (हरिशचंद्रपुर) के रहने वाले बताए जाते हैं, जिनकी पहचान सद्दाम हुसैन (20 वर्ष, मृतक) और रामजान अली (30 वर्ष, गंभीर) के रूप में हुई है।
एसकेपुरी थानाध्यक्ष जीतेंद्र राणा ने बताया कि देर रात यह हादसा हुआ है। किसी प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। उसी में मैनहोल में दोनों मजदूर फंस गए और दम घूटने के कारण सद्दाम हुसैन (मजदूर) की मौत हो गई है।
हलचल नहीं मिली तो भाई टंकी में उतरा:
सफाई कर्मी के निलेश के अनुसार मंगलवार रात पानी टंकी स्थित 30 फीट गहरे मैनहोल से मिट्टी निकालने का काम चल रहा था। इसके बाद उसमें और कई काम होने थे। काम के दौरान एक मजदूर सीवर के अंदर गया, लेकिन कुछ ही मिनटों में वहां पहले से जमी जहरीली गैस के कारण उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और वह बेहोश हो गया।
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बाहर मौजूद अन्य मजदूर और क्रेन वाले ने कई बार आवाज लगाई। रस्सी को हिलाया, लेकिन कोई हलचल नहीं हुआ। इसके बाद भाई को बाहर निकालने के इरादे से दूसरा मजदूर भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के नीचे उतर गया। लेकिन जहरीली गैस की चपेट में आकर वह भी बेहोश हो गया।
आधी रात को चला रेस्क्यू ऑपरेशन
राज्य अग्निशमन पदाधिकारी (निदेशक) सुनील कुमार को रात करीब 12:46 बजे घटना की सूचना मिली। इसके बाद एडीएफओ इंद्रजीत कुमार के नेतृत्व में क्विक रिस्पान्स टीम और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। सीवर के भीतर गहराई अधिक होने और अंधेरा के कारण रेस्क्यू टीम को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
ढाई घंटे रेस्क्यू अभियान चलाया गया। सबसे पहले नीचे फंसे मजदूरों तक आक्सीजन पहुंचाई गई, ताकि उनकी सांसें चलती रहें। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने रस्सी के सहारे दोनों को बाहर निकाला और तुरंत अस्पताल भेजा, लेकिन तब तक सद्दाम की मौत हो चुकी थी।
घटनास्थल पर स्थानीय लोगों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिसे नियंत्रित करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एडीएफओ इंद्रजीत ने बताया कि सूचना मिलते ही मौके पर टीम पहुंच गई थी। आक्सीजन भी अंदर भेजा गया था, जिससे एक की जान भी बच गई।
घटनास्थल पर कमियां हुईं उजागर:
1. बगैर गैस जांच के लिए उतारा:
सीवर या मैनहोल में उतरने से पहले नियमानुसार गैस डिटेक्टर मशीन से जांच अनिवार्य है, ताकि हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन और कार्बन मोनो आक्साइड जैसी जानलेवा गैसों का पता चल सके। जमीनी हकीकत यह रही कि बिना किसी जांच के मजदूरों को सीधे नीचे भेज दिया गया।
2. सुरक्षा उपकरणों का अभाव:
मजदूरों के पास न तो आक्सीजन सपोर्ट सिस्टम था, न फुल बाडी हार्नेस और न ही गैस मास्क। उन्हें केवल दस्ताने, रबर के जूतों (गमबूट) और एक टोपी के भरोसे मौत के मुंह में धकेल दिया गया।
3. मशीन से सफाई का दावा फेल:
सरकारी दावों के बावजूद मैन्युअल स्कैवेंजिंग (हाथ से सफाई) धड़ल्ले से जारी है। सवाल यह है कि मौके पर जेटिंग या सक्शन मशीनें क्यों उपलब्ध नहीं थीं?
4. सुस्त रेस्क्यू सिस्टम:
सीवर हादसों में शुरुआती मिनट सबसे कीमती होते हैं। मजदूरों को बाहर निकालने में करीब ढाई घंटे का समय लग गया। मौके पर कोई तत्पर इमरजेंसी या आपदा प्रोटोकॉल तैयार नहीं था।
| आवश्यक उपकरण | उपयोग और महत्व | अनुमानित कीमत |
|---|---|---|
| 1. बेसिक पीपीई किट (हेलमेट, रबर ग्लव्स, गमबूट, सेफ्टी सूट) | सुरक्षा के लिए बुनियादी बचाव | ₹2,000 - ₹8,000 |
| 2. गैस डिटेक्टर | जहरीली गैस और आक्सीजन लेवल की जांच | ₹8,000 - ₹40,000 |
| 3. एससीबीए आक्सीजन सेट | जहरीली गैस के बीच 30 मिनट तक एयर सप्लाई | ₹23,000 - ₹80,000 |
| 4. फुल बाडी हार्नेस | बेहोश होने पर मजदूर को सुरक्षित खींचने के लिए | ₹2,000 - ₹10,000 |
| 5. गैस प्रोटेक्शन सूट | रसायनों और गैसों से पूरे शरीर का बचाव | ₹15,000 - ₹30,000 |
मैनहोल से जुड़े पूर्व के हादसे:
- अप्रैल, 2025 : चांदमारी रोड में सिवरेज सफाई के दौरान दम घूटने से मजदूर की मौत
- अप्रैल 2023 : जकरियापुर पुल के पास दो मजदूर की मैनहोल में दम घूटने से मौत
- मई 2017 : इनकम टैक्स गोलंबर के पास दो सफाईकर्मियों की सीवेज लाइन में दम घूटने से मौत