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सुहागिन 14 सितंबर को करेंगी तीज व्रत, 15 से आरंभ होगा गणेश उत्सव

Published: Mon, 07 Sep 2026 03:29 PM (IST)

पटना में हरितालिका तीज व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसमें सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला उपवास रखेंगी। ...और पढ़ें

सुहागिन 14 सितंबर को करेंगी तीज व्रत, 15 से आरंभ होगा गणेश उत्सव (AI Generated Image)

सुहागिन 14 सितंबर को करेंगी तीज व्रत, 15 से आरंभ होगा गणेश उत्सव (AI Generated Image)

HighLights

  1. हरितालिका तीज व्रत 14 सितंबर को मनाया जाएगा।

  2. सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए निर्जला उपवास रखेंगी।

  3. गणेश उत्सव 15 सितंबर से 25 सितंबर तक चलेगा।

जागरण संवाददाता, पटना। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला हरितालिका तीज व्रत इस बार 14 सितंबर को रखा जाएगा। अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखेंगी। कुंवारी कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए व्रत करेंगी।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7.15 बजे से आरंभ होकर 14 सितंबर सुबह 7.29 बजे तक रहेगी। उदयकाल व्यापिनी तिथि के शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार 14 सितंबर को मनेगा।

ज्योतिष आचार्य पंडित डॉ. राघव नाथ झा ने बताया कि हरितालिका तीज की परंपरा माता पार्वती की कठोर तपस्या से जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने कठिन तप किया था।

उनकी सखियों द्वारा उन्हें गुप्त स्थान पर ले जाने के प्रसंग से ही ‘हरितालिका’ नाम की व्युत्पत्ति मानी जाती है। व्रती महिलाएं 14 सितंबर को पूरे दिन निर्जल उपवास रखने के बाद प्रदोषकाल में मिट्टी से निर्मित उमा-महेश्वर एवं श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार पूजन करेंगी।

तीज व्रत कथा का श्रवण, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण भी होगा। 15 सितंबर की सुबह व्रत का पारण किया जाएगा। हरितालिका तीज केवल उपवास नहीं, बल्कि शिव-पार्वती की आराधना, दांपत्य मंगल और नारी के अटूट संकल्प का सनातन पर्व है।

पंडित राकेश झा ने बताया कि माता पार्वती ने शिव शंकर की बालुकामयी प्रतिमा बनाकर पूजा की थी। पार्थिव की प्रतिमा बना कर गंगाजल, अक्षत, चंदन, बेलपत्र, ऋतुफल व पकवान आदि से पूजन करना कल्याणकारी माना जाता है।

तुला लग्न एवं ऐन्द्र योग में शुरू होगा गणेश उत्सव:
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी में 15 सितंबर मंगलवार को विशाखा नक्षत्र एवं ऐन्द्र योग में बुद्धि, शुभता व सिद्धि के प्रदेता मंगलमूर्ति भगवान गणेश का प्रकटोत्सव मनाया जाएगा। इस दिन प्रथम पूज्य गणपति देव का 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव तुला लग्न एवं ऐन्द्र योग में शुरू होगा। गणेश उत्सव का महापर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 15 सितंबर से 25 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। गणपति प्रभु की उपासना से हर काम सिद्ध, ऐश्वर्य की प्राप्ति, जीवन से सारे अवरोध तथा विघ्न-बाधाओं को दूर कर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। गणेश चतुर्थी में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर मंत्रोच्चार से उनकी पूजा होगी। भगवान गणेश की मिट्टी से निर्मित प्रतिमा का पूजन करना शुभ माना जाता है।